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UP Scholarship: योगी सरकार का छात्रों को तोहफा! खाते में आएंगे ₹6,000, जानें किन छात्र-छात्राओं को मिलेगा इसका लाभ।

बुंदेलखंड के 7 जिलों में कक्षा 9-12 के बच्चों को सरकारी स्कूल से 5 किमी दूर रहने पर सालाना 6 हजार रुपये ट्रैवल अलाउंस! फॉर्म भरें, प्रधान से वेरिफाई कराएं, DBT से पैसे खाते में। उपस्थिति 10% बढ़े तो पहली किस्त 5 सितंबर से। ड्रॉपआउट रेट घटेगा, पढ़ाई आसान! 24 हजार बच्चे फायदेमंद।

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UP Scholarship: योगी सरकार का छात्रों को तोहफा! खाते में आएंगे ₹6,000, जानें किन छात्र-छात्राओं को मिलेगा इसका लाभ।

यह खबर सुनकर तो दिल खुश हो गया! कल्पना कीजिए, उन गांव के बच्चों की जो रोज सुबह 5-6 किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल जाते हैं, उनके लिए अब सरकार ने एक ऐसा तोहफा दिया है जो उनकी जिंदगी आसान बना देगा। बुंदेलखंड के झांसी, चित्रकूट, जालौन, हमीरपुर, महोबा, बांदा और सोनभद्र जैसे दूरस्थ जिलों में रहने वाले कक्षा 9 से 12 के छात्र-छात्राओं को अब स्कूल आने-जाने का खर्चा नहीं उठाना पड़ेगा।

प्रदेश सरकार ने यात्रा भत्ता शुरू करने का ऐलान किया है, जो सीधे बैंक खाते में आएगा। आइए, इस योजना की पूरी डिटेल समझते हैं, ताकि आप भी जान सकें कि ये बच्चों के भविष्य को कैसे मजबूत बनाएगी।

स्कूल जाना अब बोझ नहीं, राहत बनेगा

दोस्तों, सोचिए उन मासूमों की हालत जो बारिश हो या धूप, पैदल या साइकिल पर स्कूल पहुंचते हैं। सरकार ने फैसला लिया है कि अगर आपका घर राजकीय माध्यमिक स्कूल से 5 किलोमीटर या ज्यादा दूर है, तो आपको सालाना 6 हजार रुपये मिलेंगे। ये पैसे कक्षा 9 से 12 तक पढ़ने वाले हर बच्चे को दिए जाएंगे। ऊपर से, पीएम श्री योजना के 146 चुने हुए स्कूलों में पढ़ने वाली लड़कियों को भी ये फायदा मिलेगा। ये सिर्फ पैसे की बात नहीं, बल्कि बच्चों को स्कूल की ओर खींचने का एक बड़ा कदम है। विभाग ने सारी तैयारी कर ली है, और ये योजना इसी सत्र से शुरू हो जाएगी।

आवेदन कैसे करें, क्या हैं शर्तें?

अब सवाल ये कि पैसे कैसे मिलेंगे? बहुत आसान! माध्यमिक शिक्षा विभाग ने एक साधारण फॉर्म तैयार किया है। बच्चे को बस ये साबित करना है कि उनके घर से 5 किमी के अंदर कोई सरकारी माध्यमिक स्कूल नहीं है। फॉर्म भरकर ग्राम प्रधान से गांव स्तर पर और प्रधानाचार्य से स्कूल स्तर पर सत्यापन कराना पड़ेगा। शहरों में ये जिम्मेदारी पार्षद निभाएंगे।

एक बार वेरिफिकेशन हो गया, तो डीबीटी के जरिए पैसे सीधे खाते में। पहली किस्त तो 5 सितंबर से ही शुरू हो सकती है। लेकिन हां, एक शर्त है – उपस्थिति रेगुलर होनी चाहिए, और पिछले रिकॉर्ड से कम से कम 10% की बढ़ोतरी दिखानी होगी। नियम तो बनते हैं, ताकि फायदा सच्चे जरूरतमंदों को मिले।

कितने बच्चे होंगे फायदेमंद?

ये योजना बुंदेलखंड के इन 7 जिलों में कुल 24 हजार बच्चों के लिए है, जिनके घर स्कूल से 5 किमी दूर हैं और बीच में कोई दूसरा सरकारी स्कूल नहीं। पीएम श्री स्कूलों में 4 हजार लड़कियां अतिरिक्त लाभ लेंगी। कुल मिलाकर, हजारों परिवारों की जेब हल्की होगी। कल्पना कीजिए, वो साइकिल का टायर पंक्चर हो जाए तो टेंशन नहीं, बस स्कूल जाओ और पढ़ाई पर फोकस करो। ये पैसे न सिर्फ आने-जाने का खर्चा कवर करेंगे, बल्कि बच्चों को पढ़ाई के प्रति जोश भी भरेंगे।

ड्रॉपआउट रेट क्यों घटेगा

समग्र शिक्षा माध्यमिक के अपर राज्य परियोजना निदेशक विष्णु कांत पांडेय कहते हैं कि ये पहली बार हो रही पहल है। दूर के गांवों से स्कूल आने वाले बच्चों के लिए ये किसी वरदान से कम नहीं। उपस्थिति बढ़ेगी, ड्रॉपआउट कम होगा। अक्सर देखा गया है कि आर्थिक तंगी से बच्चे पढ़ाई छोड़ देते हैं, लेकिन अब ऐसा नहीं होगा। ये योजना सिर्फ पैसों की नहीं, बल्कि शिक्षा को हर घर तक पहुंचाने की मिसाल है। सरकार का ये कदम बुंदेलखंड जैसे पिछड़े इलाकों को नई ऊंचाई देगा।

भविष्य की उम्मीदें और सलाह

अंत में, अभिभावकों से अपील है – बच्चों का फॉर्म जल्दी भरवाएं, वेरिफिकेशन करवाएं। ये मौका हाथ से न जाने दें। सरकार ने साबित कर दिया कि शिक्षा उनकी प्राथमिकता है। आने वाले दिनों में शायद ये योजना पूरे प्रदेश में फैले। अगर आपका बच्चा फिट बैठता है, तो आज ही स्कूल जाकर जानकारी लें। शिक्षा ही तो देश का भविष्य है, और ये कदम उसी दिशा में बड़ा इशारा है।

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info@dietjjr.in

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