
बिहार सरकार ने सरकारी जमीन पर माफियाओं की नजर हटाने के लिए जोरदार कदम उठाया है। राजस्व एवं भूमि सुधार विभाग ने सात तरह की सरकारी जमीनों पर गलत तरीके से बनी जमाबंदियों को रद्द करने का आदेश दिया। प्रधान सचिव सी.के. अनिल का पत्र आया है – अब DM, अपर DM और CO सक्रिय। सोचिए, गरीबों की जमीनें वापस आएंगी!
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सात तरह की जमीनें
सरकार की नजर सात कैटेगरी पर। पहली, गैर मजरुआ आम, कैसरे-हिंद और खास महाल की जमीनें जिनकी बंदोबस्ती नहीं हुई। दूसरी, जिला परिषद, नगर पंचायत, ग्राम पंचायत वाली। तीसरी, राज्य सरकार के विभाग, बोर्ड, निगम या बिहार उद्योग प्रमोशन बोर्ड (BIADA) की। चौथी, केंद्र सरकार के मंत्रालयों की। पांचवीं, धार्मिक न्यास बोर्ड, सरकारी ट्रस्ट, गौशालाओं की। ये सब सर्वे खतियान में दर्ज हैं, लेकिन अवैध जमाबंदी बनी। अपर समाहर्ता 45 दिनों में रद्द करेंगे।
अपर DM की जिम्मेदारी
अपर समाहर्ताओं को पत्र में साफ कहा गया – ऊपर बताई सातों तरह की जमीनों पर बनी जमाबंदियां रद्द करो। सर्वे खतियान चेक करके तुरंत एक्शन। ये जमीनें गरीबों, विकास के लिए जरूरी। एक अधिकारी ने कहा, “अब माफिया भागेंगे।” 45 दिन का अल्टीमेटम – देरी बर्दाश्त नहीं। इससे लाखों एकड़ सरकारी जमीन मुक्त होगी।
CO पर सख्ती
अंचल अधिकारी (CO) सुन लो! 3 जून 1974 से तुम सरकारी जमीन के कलेक्टर हो। अगर तुम्हारे समय अवैध हस्तांतरण या दाखिल-खारिज हुआ, तो विभागीय कार्रवाई। अभियान चलाओ, पुराने रिकॉर्ड चेक करो। चिन्हित मामलों का रिपोर्ट 31 जनवरी 2026 तक अपर DM को भेजो। एक CO बोले, “अब साफ-सफाई करेंगे।” ये जवाबदेही लाएगा।
DM की भूमिका
समाहर्ता (DM) सरकारी जमीन के रक्षक हैं। अभियान की मॉनिटरिंग करो। जिला-अंचल स्तर पर लैंड बैंक बनाओ। जमीन वापसी सुनिश्चित करो। प्रधान सचिव ने कहा – ये तुम्हारी पूरी जिम्मेदारी। इससे इंडस्ट्री, स्कूल, अस्पताल बन सकेंगे। बिहार का विकास तेज होगा। DM सक्रिय हों, तो माफिया हार मानेंगे।
आम आदमी को फायदा, भ्रष्टाचार पर ब्रेक
ये कदम बिहार की जमीन लूट रोकेगा। गरीबों को पट्टा मिलेगा, विकास होगा। प्रमंडलीय आयुक्त, DM सब मैदान में। जनता खुश – “अब हमारी जमीन सुरक्षित।” सरकार की मंशा साफ: पारदर्शिता। अगर सरकारी जमीन पर कब्जा है, तो चेक करो। समय रहते सुधारो!
















