
आधार कार्ड अपडेट कराने के लिए लंबी लाइनों में घंटों खड़े होने की मजबूरी खत्म। जिले में डाक विभाग ने 150 डाक कर्मियों को हैंडहेल्ड डिवाइस थमा दी हैं। अब डाकिया भाई गांव-गांव घूमकर आपका या बच्चों का आधार ठीक कर देंगे। सोचिए, बैंकों-डाकघरों के चक्कर लगाने की जरूरत नहीं। ये बदलाव आम आदमी की जिंदगी आसान बना रहा है।
Table of Contents
हैंडहेल्ड डिवाइस
ये डिवाइस जेब में समा जाने वाला स्मार्ट गैजेट है – स्मार्टफोन या टैबलेट से चलता है। डाक कर्मी इसे हाथ में पकड़कर बायोमेट्रिक चेक करते हैं, फोटो खींचते हैं और अपडेट हो जाता है। कोई जटिल मशीन नहीं, बस पोर्टेबल और यूजर-फ्रेंडली। एक डाकिया ने बताया, “पहले लोग दूर आते थे, अब हम उनके दरवाजे पर।” इससे समय की बचत और गलतियां कम हो रही हैं।
गांवों में बच्चों का आधार
गांव के छोटे बच्चे आधार से वंचित रह जाते थे? अब नहीं। 5 साल से कम उम्र के बच्चों का आधार बनाने का काम डाक कर्मी घर-घर पहुंचकर कर रहे हैं। भ्रमण के दौरान तुरंत अपडेट। माता-पिता खुश हैं “बच्चे का स्कूल एडमिशन आसान हो गया।” ये सुविधा ग्रामीण इलाकों में क्रांति ला रही है, जहां सेंटर दूर होते हैं।
18 सेंटर: शहर से गांव तक कवरेज
जिले में 18 जगहों पर डाक विभाग के आधार सेंटर चल रहे हैं। एक डिवाइस से रोज 24-25 आधार बनते हैं। मुख्य सेंटर जैसे लाजपतनगर प्रधान डाकघर, कलेक्ट्रेट फतेहपुर, हैदरगढ़, त्रिवेदीगंज, रामसनेहीघाट, सफदरगंज, कुर्सी, देवा, दरियाबाद, सुबेहा, सिद्धौर। उप-डाकघरों में भी सुविधा। लोग आकर अपडेट करा रहे हैं। औसतन हजारों सर्विसेज हो चुकीं।
सुविधा के फायदे
पहले आधार अपडेट के लिए छुट्टी लेकर जाना पड़ता था। अब डाकिया आ जाए। खासकर बुजुर्गों, महिलाओं और दूरदराज वालों के लिए वरदान। डिवाइस से बर्थ सर्टिफिकेट, मोबाइल लिंकिंग सब हो जाता है। पारदर्शिता बनी रहती है। एक किसान बोला, “मेरा पुराना आधार ठीक हो गया, अब सब्सिडी मिलेगी।” सरकार की डिजिटल इंडिया को बूस्ट।
भविष्य की योजनाएं
150 डाकियों को ट्रेनिंग देकर ये सुविधा शुरू हुई। जल्द और डिवाइस मिलेंगी। डाक विभाग आधार सर्विस को नेशनल स्तर पर बढ़ा रहा। अगर आपका आधार पेंडिंग है, तो नजदीकी डाकिया या सेंटर संपर्क करें। ये बदलाव बताता है कि तकनीक गांव तक पहुंच रही है। जागरूक बनें, सुविधा लें!
















