
तेजी से बदलते कॉरपोरेट माहौल में जिस प्रोफेशन की मांग लगातार बढ़ रही है, उनमें Company Secretary (CS) का नाम प्रमुख है। कंपनी के कानूनी, प्रशासनिक और कॉरपोरेट गवर्नेंस से जुड़े मामलों में कंपनी सेक्रेटरी की भूमिका बेहद अहम मानी जाती है। यही कारण है कि आज 12वीं के बाद करियर विकल्प तलाश रहे छात्र इस प्रोफेशन को लेकर गंभीरता से सोच रहे हैं।
अक्सर छात्रों के मन में यह सवाल उठता है कि 12वीं के बाद CA करें या CS। कुछ लोग यह भी मानते हैं कि जो छात्र CA नहीं बन पाते, वे CS की पढ़ाई करते हैं। हालांकि, विशेषज्ञों की मानें तो यह धारणा पूरी तरह गलत है। CA और CS दोनों अलग-अलग प्रोफेशनल कोर्स हैं, जिनका कार्यक्षेत्र और जिम्मेदारियां भी अलग हैं।
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कौन होते हैं Company Secretary

Company Secretary एक क्वालिफाइड प्रोफेशनल होता है, जो यह सुनिश्चित करता है कि कंपनी भारत में लागू सभी कानूनों, नियमों और विनियमों के तहत काम कर रही है या नहीं।
कंपनी के बोर्ड ऑफ डायरेक्टर्स को कानूनी सलाह देना, बोर्ड मीटिंग्स का संचालन, शेयरहोल्डर्स से जुड़े मामलों को देखना और सरकारी रेग्युलेटरी संस्थाओं के साथ समन्वय बनाना, यह सभी जिम्मेदारियां एक CS के दायरे में आती हैं।
कंपनी सेक्रेटरी प्रोफेशन की शुरुआत
भारत में कंपनी सेक्रेटरी प्रोफेशन को कानूनी मान्यता कंपनी सेक्रेटरी एक्ट, 1980 के तहत मिली। इसके बाद Institute of Company Secretaries of India (ICSI) की स्थापना की गई, जो आज इस कोर्स की एकमात्र नियामक संस्था है।
नियमों के अनुसार, जिन कंपनियों का पेड-अप शेयर कैपिटल 10 करोड़ रुपये या उससे अधिक होता है, वहां एक क्वालिफाइड Company Secretary की नियुक्ति अनिवार्य होती है।
कंपनी सेक्रेटरी की मुख्य जिम्मेदारियां
- कंपनी लॉ और कॉरपोरेट गवर्नेंस का पालन सुनिश्चित करना
- बोर्ड मीटिंग्स और AGM से जुड़ा काम देखना
- टैक्स लॉ और बिजनेस लॉ से संबंधित मामलों में सलाह देना
- शेयरहोल्डर्स और निवेशकों के हितों की रक्षा करना
- सरकारी और रेग्युलेटरी एजेंसियों के साथ तालमेल बनाना
कहां से होती है CS की पढ़ाई
Company Secretary बनने के लिए किसी कॉलेज या यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेने की आवश्यकता नहीं होती। इच्छुक छात्रों को ICSI में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। CS कोर्स की सभी परीक्षाएं और ट्रेनिंग ICSI के अंतर्गत ही आयोजित की जाती हैं।
12वीं के बाद कैसे बनें Company Secretary
12वीं पास करने के बाद CS बनने की प्रक्रिया तीन चरणों में पूरी होती है-
- CS Executive Entrance Test (CSEET)
- CS Executive Programme
- CS Professional Programme
CSEET में चार पेपर होते हैं, जिनमें बिजनेस कम्युनिकेशन, लीगल एप्टीट्यूड, इकॉनॉमिक्स और करंट अफेयर्स शामिल हैं।
ग्रेजुएट छात्रों को मिलती है छूट
जिन छात्रों ने ग्रेजुएशन पूरी कर ली है, उन्हें CSEET देने की आवश्यकता नहीं होती। ऐसे छात्र सीधे CS Executive Programme के लिए आवेदन कर सकते हैं।
कोर्स का पैटर्न
ICSI के अनुसार-
- CSEET: 4 पेपर
- Executive Programme: 7 पेपर
- Professional Programme: 7 पेपर
CSEET परीक्षा साल में तीन बार फरवरी, जून और अक्टूबर में आयोजित की जाती है।
आर्टिकलशिप और ट्रेनिंग क्यों है जरूरी
CS कोर्स में सिर्फ परीक्षा पास करना ही काफी नहीं होता। साथ ही Executive परीक्षा पास करने के बाद 21 महीने की आर्टिकलशिप अनिवार्य है। इसके अलावा Executive Development Programme (EDP) और अंत में Corporate Leadership Development Programme (CLDP) भी करना होता है, बिना ट्रेनिंग पूरी किए छात्र को Company Secretary के रूप में क्वालिफाइड नहीं माना जाता।
सैलरी और करियर की संभावनाएं
Company Secretary के रूप में करियर शुरू करने वाले छात्रों को शुरुआती दौर में 3 से 6 लाख रुपये सालाना तक का पैकेज मिल सकता है। अनुभव बढ़ने के साथ यह सैलरी 10 से 20 लाख रुपये सालाना या उससे अधिक तक पहुंच सकती है।
MNCs और बड़ी कंपनियों में सीनियर CS प्रोफेशनल्स की डिमांड लगातार बनी हुई है।
क्यों चुनें CS कोर्स
- कॉरपोरेट सेक्टर में सम्मानजनक पद
- लॉ और मैनेजमेंट का बेहतरीन संयोजन
- स्थिर करियर और ग्रोथ की बेहतर संभावनाएं
- भारत के साथ-साथ विदेशों में भी अवसर
















