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OBC छात्रों के लिए अनुच्छेद 15(5) क्या है? 20 साल बाद भी 27% कोटे का पूरा लाभ न मिलने की क्या है वजह; जानें

20 साल बीत गए अनुच्छेद 15(5) पर, फिर भी निजी कॉलेजों में OBC 27% आरक्षण अधर में! IIT-NEET की रेस में लाखों स्टूडेंट्स फंसे। केंद्र कानून न बनाए तो JEE कॉम्पिटिशन कम कैसे होगा? समय आ गया न्याय का – निजी संस्थानों में कोटा लागू करो!

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OBC छात्रों के लिए अनुच्छेद 15(5) क्या है? 20 साल बाद भी 27% कोटे का पूरा लाभ न मिलने की क्या है वजह; जानें

दोस्तों, सोचो जरा – आज से ठीक 20 साल पहले, 2006 में एक बड़ा कदम उठा था। संविधान के अनुच्छेद 15 में नया क्लॉज (5) जोड़ा गया, जिसने निजी संस्थानों के दरवाजे आरक्षित वर्गों के लिए खोलने का वादा किया। खासकर OBC छात्रों के लिए 27% कोटा। लेकिन 2026 आ गया, और अभी भी वो सपना अधूरा सा लगता है। लाखों स्टूडेंट्स JEE-NEET की रेस में पसीना बहा रहे हैं, जबकि निजी कॉलेजों में आरक्षण का फायदा न के बराबर। ये ऐतिहासिक बदलाव क्यों फेल हो गया? चलो, बात करते हैं।

अनुच्छेद 15(5) की वो बड़ी शुरुआत

20 जनवरी 2006 को मनमोहन सिंह सरकार ने 93वें संशोधन से ये कमाल किया। इसका मतलब? राज्य सरकारें सामाजिक-शैक्षणिक रूप से पिछड़े वर्गों – SC 15%, ST 7.5%, OBC 27% – के लिए निजी संस्थानों में स्पेशल प्रावधान बना सकें। IIT, IIM, AIIMS जैसे केंद्रीय संस्थानों में ये लागू हो गया। मेडिकल में NEET से 2021 के बाद OBC को फायदा मिला। लेकिन निजी इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट कॉलेज? वहां तो जैसे बात ही न बनी। ये संशोधन सरकार को कानून बनाने की ताकत देता है, लेकिन बिना कानून के ये सिर्फ कागज पर रह गया।

निजी संस्थानों में क्यों अटका पड़ा आरक्षण?

भारत में शिक्षा का बड़ा हिस्सा निजी क्षेत्र संभाल रहा है। अच्छे कोर्सेज – इंजीनियरिंग, MBA, MBBS – के लिए स्टूडेंट्स प्राइवेट कॉलेजों की लाइन लगा देते हैं, क्योंकि फीस कम और प्लेसमेंट ठीक। लेकिन यहां SC/ST/OBC आरक्षण? नाममात्र का। सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में अनुच्छेद 15(5) को वैध कहा, फिर भी केंद्र ने कोई पैन-इंडिया कानून नहीं बनाया।

सिर्फ केंद्रीय संस्थान कवर हुए। राज्य स्तर पर महाराष्ट्र, तमिलनाडु जैसे कुछ राज्यों ने अपने कानून बनाए, लेकिन उत्तर प्रदेश, बिहार जैसे जगहों पर सन्नाटा। नतीजा? आरक्षित स्टूडेंट्स सरकारी कॉलेजों की होड़ में फंस जाते हैं।

JEE-NEET की रेस क्यों इतनी कठिन?

लाखों बच्चे हर साल JEE Main/Advanced या NEET देते हैं। क्यों? सरकारी कॉलेजों में कम फीस और अच्छी सुविधाएं। लेकिन सीटें सीमित, कॉम्पिटिशन किलर। अगर निजी कॉलेजों में 27% OBC कोटा लागू हो जाए, तो रिजर्व्ड कैटेगरी वाले स्टूडेंट्स वहां एडमिशन ले सकेंगे। सरकारी कॉलेजों पर प्रेशर कम होगा, कटऑफ गिरेंगे।

जनरल कैटेगरी वालों को भी राहत मिलेगी। लेकिन ये कदम क्यों नहीं उठा? प्राइवेट संस्थान मैनेजमेंट विरोध करता है, कहते हैं क्वालिटी गिर जाएगी। हकीकत में, ये सामाजिक न्याय का सवाल है।

आगे क्या रास्ता? समय आ गया बदलाव का

20 साल हो चुके, अब जागने का वक्त है। केंद्र सरकार को सख्त कानून लाना चाहिए – सभी निजी संस्थानों में आरक्षण अनिवार्य। सुप्रीम कोर्ट के फैसलों को लागू करने के लिए संसद को एक्ट पास करे। राज्य भी आगे आएं। इससे न सिर्फ पिछड़े वर्ग मजबूत होंगे, बल्कि शिक्षा सिस्टम ज्यादा इक्विटेबल बनेगा। स्टूडेंट्स कम स्ट्रेस में पढ़ सकेंगे। गणतंत्र दिवस के ठीक पहले ये मुद्दा याद दिलाता है – संविधान सबके लिए है। तुम्हारा क्या ख्याल है, क्या निजी कॉलेजों में कोटा जरूरी है?

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info@dietjjr.in

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