Join Youtube

Vande Mataram: अब वंदे मातरम् के अपमान पर होगी जेल? ‘जन गण मन’ जैसा सख्त कानून बनाने की तैयारी में सरकार।

राष्ट्रीय गान जैसी सजा और अनिवार्य नियमों पर हाईलेवल मीटिंग, क्या बदलेगा देशभक्ति का चेहरा? राजनीतिक बवाल शुरू।

Published On:

केंद्र सरकार राष्ट्रीय गीत ‘वंदे मातरम’ को नई ऊंचाई देने की तैयारी में जुट गई है। हाल की एक उच्च स्तरीय बैठक में इसकी गरिमा सुनिश्चित करने के लिए राष्ट्रीय गान जैसे सख्त नियम बनाने पर विचार हुआ। यह बदलाव देशभक्ति की भावना को और मजबूत कर सकता है।

Vande Mataram: अब वंदे मातरम् के अपमान पर होगी जेल? 'जन गण मन' जैसा सख्त कानून बनाने की तैयारी में सरकार।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि और प्रेरणा स्रोत

‘वंदे मातरम’ की रचना 19वीं शताब्दी में बंकिमचंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौर में यह गीत लाखों भारतीयों का प्रेरणा स्रोत बना। आजादी की लड़ाई में इसका जाप होता रहा, जो मातृभूमि के प्रति समर्पण का प्रतीक था। संविधान निर्माताओं ने इसे राष्ट्रीय गान के बराबर स्थान दिया, लेकिन व्यावहारिक नियमों की कमी बनी रही।

सरकारी पहल और बैठक की चर्चा

गृह मंत्रालय की अगुवाई में आयोजित बैठक में वरिष्ठ अधिकारियों ने गीत के गायन के लिए स्पष्ट दिशानिर्देश बनाने पर मंथन किया। सवाल उठे कि सरकारी समारोहों, स्कूलों या सार्वजनिक स्थानों पर इसे कब अनिवार्य किया जाए। साथ ही, अपमान की स्थिति में दंड के प्रावधान पर भी विचार हुआ। यह कदम राष्ट्रीय गीत की पवित्रता को कानूनी ढांचे में बांधने की दिशा में है। सरकार ने इसके सम्मान में वर्ष भर चलने वाले सांस्कृतिक आयोजन भी शुरू किए हैं, जो 2026 तक चलेंगे।

वर्तमान कानूनी ढांचे की कमियां

राष्ट्रीय गान ‘जन गण मन’ को संविधान के अनुच्छेद 51A(क) के तहत मजबूत सुरक्षा मिली है। गृह मंत्रालय के नियम कहते हैं कि इसके दौरान खड़े होना जरूरी है, विकृत गायन या बाधा पर तीन साल जेल हो सकती है। लेकिन ‘वंदे मातरम’ के लिए ऐसा कोई स्पष्ट कानून नहीं। न तो गायन के अवसर तय हैं, न अपमान पर सजा। यह अंतर अब दूर करने की कोशिश हो रही है।

राजनीतिक बहसें और ऐतिहासिक विवाद

यह मुद्दा राजनीति का केंद्र भी रहा है। सत्तारूढ़ दल का कहना है कि अतीत में कुछ ताकतों ने तुष्टिकरण के नाम पर इसके महत्व को कम किया। संसद में गृह मंत्री ने कहा कि गीत के कुछ छंद, जहां मां भारती को देवी रूप दिया गया, को हटाने की मांग ने विवाद पैदा किया। विपक्ष इसे इतिहास की गलत व्याख्या बताता है और राजनीतिकरण का आरोप लगाता है। संविधान सभा में भी बहस हुई थी कि सभी धर्मों के लिए यह स्वीकार्य हो।

Author
info@dietjjr.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार

https://staggermeaningless.com/iqcu0pqxxk?key=786df836b335ac82e4b26a44d47effd5