Join Youtube

UP सरकार का बड़ा फैसला: SIR के लिए सामान्य निवास प्रमाणपत्र अब नहीं होगा मान्य, ये डॉक्यूमेंट्स जरूरी

मतदाता नाम कटने का खतरा! UP में सामान्य निवास प्रमाणपत्र खारिज, लाखों परेशान। आयोग के 13 दस्तावेजों में स्थायी वाला ही चलेगा, लेकिन राज्य में वो मिलता ही नहीं। मुख्य अधिकारी बोले- SIR का मकसद फर्जी वोटर हटाना। नोटिस मिला? ये दस्तावेज जुटाएं, वरना वोट का हक जाए!

Published On:
UP सरकार का बड़ा फैसला: SIR के लिए सामान्य निवास प्रमाणपत्र अब नहीं होगा मान्य, ये डॉक्यूमेंट्स जरूरी

सोचिए, आप सालों से एक ही जगह रह रहे हैं, वोट डालते आए हैं, लेकिन अचानक चुनाव आयोग का नोटिस आ जाए कि आपका नाम पुरानी मतदाता सूची से मैच नहीं कर रहा। बरेली के आंवला इलाके में मधु नाम की एक महिला के साथ यही हुआ। उन्हें नोटिस मिला क्योंकि 2003 की मतदाता सूची से उनकी मैपिंग नहीं हो पाई।

सुनवाई में उन्होंने सामान्य निवास प्रमाणपत्र दिखाया, लेकिन अधिकारी ने साफ मना कर दिया। बोले, “चुनाव आयोग के सख्त निर्देश हैं, ये दस्तावेज मान्य नहीं।” अगली तारीख दे दी गई, लेकिन मधु जैसी समस्या सिर्फ उनकी नहीं, पूरे उत्तर प्रदेश में लाखों मतदाता परेशान हैं।

सभी जिलों में फैली है ये परेशानी

यह मुश्किल सिर्फ एक कोने तक सीमित नहीं। उत्तर प्रदेश के हर जिले, हर तहसील में लोग यही शिकायत कर रहे हैं। आयोग ने स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) के तहत 13 मान्य दस्तावेजों की लिस्ट जारी की है। उसमें छठे नंबर पर “सक्षम राज्य प्राधिकारी द्वारा जारी स्थायी निवास प्रमाण पत्र” लिखा है। लेकिन हकीकत ये है कि UP में अब स्थायी निवास प्रमाणपत्र मिलना बंद हो चुका है।

जिला अधिकारी anonymously बताते हैं, “अब तो सिर्फ सामान्य निवास प्रमाणपत्र ही जारी होता है। ये छात्रवृत्ति, पेंशन, सरकारी योजनाओं सबमें चलता है।” लेखपाल भी यही कहते हैं कि तहसील से सिर्फ यही प्रमाणपत्र बनता है। फिर आयोग इसे क्यों ठुकरा रहा?

स्थायी प्रमाणपत्र की मांग, लेकिन व्यवस्था ही नहीं?

सवाल बिल्कुल जायज है – जब राज्य स्तर पर स्थायी निवास का सिस्टम ही खत्म हो गया, तो पुराने निवासी क्या करें? सालों से गांव-शहर में बसे लोग नोटिस पा रहे हैं। स्थानीय अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में मुख्य निर्वाचन अधिकारी के आदेश सुनाते हैं – “स्थायी निवास ही मान्य, सामान्य वाला नहीं। हमारे बस की बात नहीं।” ये सुनकर तो आम आदमी का सर चकराने लगता है। सरकार की तमाम स्कीम्स में सामान्य प्रमाणपत्र ठीक, लेकिन वोट के लिए क्यों नहीं? ये दोहरी नीति लोगों को परेशान कर रही है।

मुख्य अधिकारी का स्पष्टीकरण

इस पर UP के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने साफ कहा, “सामान्य निवास प्रमाणपत्र तो 5-6 महीने रहने पर ही मिल जाता है। इससे SIR का उद्देश्य पूरा नहीं होता।” SIR मतदाता सूची को साफ-सुथरा बनाने के लिए है, फर्जी वोटरों को हटाने के लिए। इसलिए ड्राफ्ट सूची में मैपिंग न होने पर नोटिस मिले, तो सिर्फ मान्य दस्तावेज ही चलेंगे। रिणवा जी ने जोर देकर कहा कि लिस्ट में स्थायी निवास है, सामान्य नहीं। ये नियम सख्त हैं ताकि वोटर लिस्ट मजबूत बने। लेकिन ग्राउंड लेवल पर ये आम लोगों के लिए मुसीबत बन गया।

कौन-कौन से दस्तावेज बचाएंगे आपको नोटिस से?

चिंता मत कीजिए, आयोग ने 13 वैध दस्तावेज बताए हैं। अगर आपके पास इनमें से कोई है, तो मैपिंग हो जाएगी। यहां लिस्ट है:

  1. केंद्र/राज्य सरकार या PSU के कर्मचारी/पेंशनभोगी को जारी ID या पेंशन ऑर्डर।
  2. 1 जुलाई 1987 से पहले जारी कोई सरकारी ID, बैंक पासबुक आदि।
  3. जन्म प्रमाण पत्र।
  4. पासपोर्ट।
  5. मैट्रिकुलेशन या स्कूल सर्टिफिकेट।
  6. स्थायी निवास प्रमाण पत्र (राज्य प्राधिकारी से)।
  7. वन अधिकार प्रमाण पत्र।
  8. OBC/SC/ST या जाति प्रमाण पत्र।
  9. राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (जहां लागू हो)।
  10. परिवार रजिस्टर।
  11. भूमि/मकान आवंटन पत्र।
  12. आधार के लिए आयोग के 9 सितंबर 2025 के निर्देश।
  13. बिहार SIR मतदाता सूची का अंश (1 जुलाई 2025 आधारित)।

इनमें से ज्यादातर घर में मिल जाएंगे। आधार पर खास नियम हैं, चेक करें।

अब क्या करें आम मतदाता?

ये समस्या हल होनी चाहिए। सरकार को UP में स्थायी प्रमाणपत्र दोबारा शुरू करना चाहिए या आयोग को सामान्य वाले को मान्य करना चाहिए। तब तक, नोटिस मिले तो घबराएं नहीं – दूसरे दस्तावेज जुटाएं। स्थानीय ERO कार्यालय से संपर्क करें। SIR का मकसद नेक है, लेकिन आम आदमी की परेशानी भी समझनी होगी। वोटिंग का हक सबका है, ये नौबत न आए कि लाखों नाम कट जाएं। जागरूक रहें, दस्तावेज तैयार रखें।

Author
info@dietjjr.in

Leave a Comment

संबंधित समाचार

https://staggermeaningless.com/iqcu0pqxxk?key=786df836b335ac82e4b26a44d47effd5