देशभर में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या ने आम लोगों की जिंदगी को मुश्किल बना दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने इस समस्या पर कड़ा रुख अपनाते हुए एक ऐसा फैसला सुनाया है, जो राज्य सरकारों के लिए चेतावनी भरा है। अब अगर कोई कुत्ता किसी व्यक्ति को काट लेता है, तो संबंधित राज्य को मुआवजा देना पड़ेगा। यह कदम इसलिए उठाया गया क्योंकि सरकारी तंत्र ने वर्षों से इस खतरे को नजरअंदाज किया।

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फैसले का पूरा सच
सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि कुत्ते के काटने से होने वाली हर छोटी-बड़ी चोट पर राज्य जवाबदेह होगा। खासकर बच्चों और बुजुर्गों के मामले में मुआवजा राशि भारी होगी, क्योंकि ये वर्ग सबसे ज्यादा प्रभावित होते हैं। अदालत ने यह भी कहा कि डॉग प्रेमी जो सड़कों पर कुत्तों को खाना खिलाते हैं, उनकी भी जिम्मेदारी तय होगी। अगर प्यार करना है तो कुत्तों को घर में ही रखें, सड़कों पर छोड़कर लोगों को खतरे में न डालें।
समस्या की जड़ कहां है?
आवारा कुत्तों की तादाद इसलिए बढ़ रही है क्योंकि एनिमल बर्थ कंट्रोल नियमों का सख्ती से पालन नहीं हो रहा। शहरों में पार्क, स्कूल, अस्पताल और रेलवे स्टेशन तक इनकी घुसपैठ हो गई है। रेबीज जैसी जानलेवा बीमारी इन्हें फैला रहे हैं, जो काटने से इंसानों तक पहुंच जाती है। फीडिंग करने वालों की वजह से ये और आक्रामक हो जाते हैं, जिससे रोजाना सैकड़ों मामले दर्ज हो रहे। गुजरात जैसे राज्यों में तो अधिकारियों को पकड़ने जाते ही डॉग लवर्स ने हमला तक कर दिया।
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सरकारों की नाकामी क्यों?
पिछले पांच सालों में केंद्र और राज्य सरकारों ने कोई ठोस कदम नहीं उठाया। नसबंदी अभियान कागजों तक सीमित रह गया। सुप्रीम कोर्ट ने फटकार लगाई कि दशकों पुरानी समस्या को हल करने में लापरवाही बरती गई। अब हर मौत या स्थायी चोट के केस में राज्यों को कोर्ट में खड़ा होना पड़ेगा। कर्नाटक जैसे राज्य पहले से ही पांच लाख तक मुआवजा दे रहे हैं, लेकिन अब यह नीति पूरे देश में लागू होने वाली है।
आगे का रास्ता क्या?
अब राज्य सरकारें नसबंदी और वैक्सीनेशन के बड़े अभियान चलाएंगी। सार्वजनिक जगहों से कुत्तों को हटाने के आदेश सख्ती से लागू होंगे। पीड़ितों को तत्काल मुआवजा मिलेगा, जिससे जागरूकता फैलेगी। डॉग फीडर्स को समझना होगा कि उनकी अच्छाई दूसरों की जान जोखिम में डाल रही है। यह फैसला लाखों परिवारों के लिए बड़ी राहत लेकर आया है, जो रोज इस डर से जीते हैं।
यह बदलाव न सिर्फ सुरक्षा बढ़ाएगा, बल्कि पशु-मानव संतुलन को भी बहाल करेगा। कुल मिलाकर, सुप्रीम कोर्ट ने साफ संदेश दिया है – कुत्तों का प्यार ठीक है, लेकिन इंसानों की सुरक्षा पहले।
















