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Stock Market Crash: निवेशकों के 6 लाख करोड़ डूबे! अडानी के शेयरों में हाहाकार की असली वजह

शेयर बाजार में भारी गिरावट! अडानी ग्रुप के शेयर 10-13% लुढ़के, 6 लाख करोड़ का नुकसान। US अभियोजकों के रिश्वतखोरी आरोपों से हड़कंप, बॉन्ड डील रद्द। निवेशक भागे, सेंसेक्स-निफ्टी धड़ाम। क्या होगा आगे?

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शेयर बाजार में ये दिन कुछ ऐसे ही चल रहे हैं जैसे कोई बड़ा तूफान आ गया हो। खासकर अडानी समूह के शेयरों की तो ले-लेना मचा हुआ है। 23 जनवरी 2026 तक की बात करें तो अमेरिकी अभियोजकों के गंभीर आरोपों ने सब कुछ उथल-पुथल कर दिया है। गौतम अडानी और उनके साथी अधिकारियों पर रिश्वतखोरी और धोखाधड़ी के इल्जाम लगे हैं, जिससे निवेशकों का भरोसा डगमगा गया।

पूरा बाजार नीचे लुढ़क रहा है, और अडानी के शेयरों में 10-20% की गिरावट देखने को मिली। आइए, इस पूरे मामले को समझते हैं, बिल्कुल घर बैठे चाय की चुस्की लेते हुए।

अमेरिकी न्याय विभाग का धमाका

सबसे पहले तो ये बात समझिए कि आग कहां से लगी। अमेरिकी न्याय विभाग ने अडानी ग्रुप के चेयरमैन गौतम अडानी और बाकी बड़े अधिकारियों पर सौर ऊर्जा के बड़े-बड़े अनुबंध हथियाने के लिए भारतीय अधिकारियों को करीब 2,100 करोड़ रुपये (यानी 250 मिलियन डॉलर) रिश्वत देने का आरोप लगाया है। सोचिए, इतने पैसे का खेल! ये खबर जैसे बम फटने जैसी थी। बाजार के लोग हैरान थे कि ये सब कैसे हो गया। अडानी ग्रुप ने अभी तक इन आरोपों को सिरे से खारिज किया है, लेकिन कानूनी जंग लंबी चलने वाली लग रही है। ये सिर्फ एक कंपनी की नहीं, बल्कि पूरे सेक्टर की साख पर सवाल उठा रही है।

निवेशकों का डर

जैसे ही ये आरोप सामने आए, विदेशी संस्थागत निवेशक (FPI) भागने लगे। भरोसा टूटा तो क्या करें? सबने तेजी से शेयर बेचना शुरू कर दिया। लोग डर रहे हैं कि इन मुकदमों से अडानी की नई परियोजनाएं रुक जाएंगी, फंड जुटाना मुश्किल हो जाएगा। घरेलू निवेशक भी घबरा गए। बाजार में पैनिक मोड ऑन हो गया – जो शेयर आ गया, वो बिक गया। अडानी एंटरप्राइजेज, अडानी पोर्ट्स, अडानी ग्रीन एनर्जी जैसे शेयरों में 20% तक की चोट लगी। ये देखकर लग रहा था जैसे कोई भूकंप आ गया हो।

बॉन्ड डील रद्द बाजार को और झटका

रिश्वतखोरी की खबर के ठीक बाद अडानी ग्रुप ने अपना 600 मिलियन डॉलर (करीब 5,000 करोड़ रुपये) का डॉलर बॉन्ड रद्द कर दिया। ये कदम बाजार के लिए नकारात्मक सिग्नल था। सोचिए, जब कंपनी खुद फंडिंग रोक रही है, तो निवेशक कैसे भरोसा करें? इससे डर और बढ़ गया कि आगे क्या होगा। बॉन्ड मार्केट में हलचल मच गई, और शेयर बाजार पर असर पड़ना लाजमी था। ये फैसला जैसे बाजार को कह रहा था – अभी तो इंतजार करो, हालात काबू में नहीं हैं।

6 लाख करोड़ की मार्केट कैप उड़ी

अब बात पूरे बाजार की। अडानी के शेयर निफ्टी और सेंसेक्स का बड़ा हिस्सा हैं। इनकी गिरावट से कुल मार्केट कैप में 6 लाख करोड़ रुपये की कमी आ गई। सेंसेक्स और निफ्टी दोनों लाल निशान पर बंद हुए। छोटे निवेशकों को सबसे ज्यादा नुकसान हुआ, जो रिटेल ट्रेडर्स हैं। बड़े प्लेयर्स भी सतर्क हो गए। ये गिरावट सिर्फ एक दिन की नहीं, बल्कि लगातार कुछ दिनों से चल रही है। बाजार के जानकार कह रहे हैं कि ये सेक्टरल करेक्शन है, लेकिन रिकवरी में वक्त लगेगा।

रेटिंग एजेंसियां और वैश्विक जांच

सबसे बड़ी चिंता तो ये है कि मूडीज जैसी रेटिंग एजेंसियां अडानी की क्रेडिट रेटिंग पर नजर रख रही हैं। अगर डाउनग्रेड हो गया, तो उधार लेना महंगा पड़ जाएगा। वैश्विक जांच का साया भी मंडरा रहा है। क्या SEC या अन्य एजेंसियां कूद पड़ेंगी? पैनिक सेलिंग इसी डर से हो रही है। लेकिन कुछ एक्सपर्ट्स कहते हैं कि ये अस्थायी है, इंडिया की इकोनॉमी मजबूत है। फिर भी, निवेशकों को सलाह है – हड़बड़ी में कुछ न करें।

अंत में, ये संकट अडानी ग्रुप के लिए बड़ा इम्तिहान है। कानूनी लड़ाई लड़ेगी कंपनी, लेकिन बाजार का मूड बदलना आसान नहीं। लाइव अपडेट्स के लिए NSE या BSE की साइट चेक करते रहें। बाजार ऊपर-नीचे होता रहता है, लेकिन स्मार्ट निवेशक वही जो सूझबूझ से खेलें। 

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info@dietjjr.in

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