
राजस्थान सरकार ने बेटियों को मजबूत बनाने के लिए लाडो प्रोत्साहन योजना शुरू की है। इसका मकसद साफ है – बेटे-बेटी में कोई भेदभाव न हो। जन्म से लेकर 21 साल की उम्र तक, सरकार कुल 1.5 लाख रुपये की मदद देती है। यह पैसे एकमुश्त नहीं, बल्कि सात चरणों में सीधे बेटी के बैंक खाते में आते हैं। योजना 2024 में मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा के नेतृत्व में लॉन्च हुई। पहले इसे मुख्यमंत्री राजश्री योजना कहा जाता था, लेकिन अब इसे और मजबूत बनाकर लाडो प्रोत्साहन नाम दिया गया। यह बदलाव देखकर लगता है कि सरकार सच में बेटियों के सपनों को हकीकत बनाना चाहती है।
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किस्तों का ऐसा प्लान जो पढ़ाई को आसान बनाए
सबसे अच्छी बात तो यह है कि पैसे पढ़ाई के हर पड़ाव पर मिलते हैं। जन्म होते ही 5,000 रुपये – खुशी का पहला तोहफा। एक साल की उम्र में टीकाकरण पूरा करने पर फिर 5,000। पहली कक्षा में एंट्री पर 10,000, छठी में 15,000, दसवीं में 20,000 और बारहवीं पास करने पर 25,000। सबसे बड़ी किस्त – 70,000 रुपये – ग्रेजुएशन पूरा करने और 21 साल की उम्र पर। कुल मिलाकर 1.5 लाख! सोचिए, कितना बोझ कम हो जाता है। मेरे एक जानने वाले के घर बेटी हुई, उन्होंने बताया कि पहली किस्त आते ही कितना सुकून मिला। यह योजना सरकारी अस्पताल में जन्मी बेटियों के लिए है, ताकि सबको बराबर मौका मिले।
पुरानी राजश्री से नई लाडो योजना तक का कमाल
ये योजना नई नहीं, बल्कि पुरानी राजश्री योजना का अपग्रेडेड वर्जन है। पहले सिर्फ 50,000 रुपये मिलते थे, लेकिन 2024 में नाम बदला, रकम दोगुनी की गई। फिर महिला दिवस पर इसे 1.5 लाख कर दिया। यह बदलाव जितना आसान लगता है, उतना ही असरदार साबित हो रहा। अब परिवार वाले बिना झिझक बेटी को अच्छी शिक्षा दिला पा रहे हैं। सरकार का यह कदम बेटी को बोझ नहीं, बल्कि संपत्ति मानने की सोच बदल रहा है। राजस्थान जैसे राज्य में जहां परंपराएं गहरी जड़ें रखती हैं, वहां यह योजना क्रांति ला रही है।
आवेदन कैसे करें?
चिंता मत कीजिए, प्रोसेस बिल्कुल आसान है। अगर बेटी सरकारी अस्पताल में पैदा हुई, तो उसका डिटेल PCTS पोर्टल पर ऑटोमैटिक अपलोड हो जाता है। फिर माता-पिता को SSO पोर्टल – sso.rajasthan.gov.in – पर रजिस्टर करना होता है। लॉगिन करें, लाडो प्रोत्साहन का फॉर्म भरें। डॉक्यूमेंट्स चाहिए – बेटी का बर्थ सर्टिफिकेट, माता-पिता का आधार, निवास प्रमाण पत्र और बैंक डिटेल्स। सब जमा होने पर वेरिफिकेशन होता है, और पहली किस्त तुरंत खाते में। मैंने सुना है, कई परिवारों को हफ्ते भर में ही पैसे मिल गए। अगर कोई दिक्कत हो, तो हेल्पलाइन पर कॉल कर लीजिए।
क्यों है यह योजना गेम-चेंजर?
यह सिर्फ पैसे की बात नहीं, बल्कि बेटियों के आत्मविश्वास की। पढ़ाई पूरी होने पर 1.5 लाख हाथ में हो, तो कॉलेज, जॉब या अपना बिजनेस शुरू करने में कितना फर्क पड़ता है। राजस्थान में ह1000 से ज्यादा बेटियां इससे फायदा ले चुकी हैं। समाज में लड़कियां आगे बढ़ेंगी, तो पूरा परिवार और राज्य प्रगति करेगा। सरकारें ऐसी योजनाओं से साबित कर रही हैं कि बेटियां देश का भविष्य हैं। अगर आपके आसपास कोई योग्य परिवार है, तो उन्हें जरूर बताएं। यह योजना न सिर्फ आर्थिक मदद है, बल्कि बेटियों को उड़ान भरने का हौसला भी।
















