
पीएम किसान सम्मान निधि योजना शुरू होने के बाद से ही किसानों के बीच एक सवाल लगातार उठता रहा है – क्या बटाईदार यानी शेयरक्रॉपर किसानों को भी इसका फायदा मिलता है? गांवों में अक्सर ऐसे किसान मिल जाते हैं जिनके पास अपनी जमीन नहीं होती, लेकिन वे दूसरे की जमीन पर बटाई या किराए पर खेती करके अपना घर चलाते हैं। स्वाभाविक है कि ऐसे किसान भी उम्मीद करते हैं कि उन्हें भी केंद्र सरकार की ओर से मिलने वाली किस्तें मिलें। लेकिन नियम क्या कहते हैं, यही समझना सबसे जरूरी है।
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किन किसानों को मिलता है PM Kisan का लाभ?
PM-Kisan योजना का मूल उद्देश्य छोटे और सीमांत किसानों को सीधी आर्थिक मदद देना है। इसके तहत सरकार पात्र किसानों को हर चार महीने में 2,000 रुपये की किस्त देती है, यानी साल भर में कुल 6,000 रुपये सीधे बैंक खाते में भेजे जाते हैं। इस योजना का सबसे बड़ा आधार है – जमीन का मालिकाना हक। यानी जिस किसान के नाम पर खेती योग्य जमीन सरकारी भू-अभिलेखों में दर्ज है, केवल वही इस योजना का लाभ लेने का हकदार माना जाता है। कागजों में नाम होना यहां सबसे अहम शर्त है।
बटाईदार किसानों को क्यों नहीं मिलता लाभ?
अब बात करें बटाईदार या शेयरक्रॉपर किसानों की। ये वे किसान हैं जो अपने नहीं, बल्कि किसी दूसरे की जमीन पर बटाई के आधार पर खेती करते हैं। फसल तैयार होने के बाद तय हिस्सा जमीन मालिक को मिलता है और बाकी बटाईदार के पास जाता है।
समस्या यह है कि ऐसी जमीन पर मालिकाना हक बटाईदार के पास नहीं, बल्कि असली जमीन मालिक के पास ही दर्ज रहता है। सरकारी रिकॉर्ड में बटाईदार का नाम नहीं होता, इसलिए योजना के नियमों के अनुसार वह पीएम किसान की किस्त पाने के लिए पात्र नहीं माना जाता। यानी साफ शब्दों में कहें तो वर्तमान नियमों के तहत बटाईदार किसानों को पीएम किसान योजना का लाभ नहीं मिलता, भले ही वे वास्तव में जमीन जोत रहे हों और मेहनत वही कर रहे हों।
जमीन के मालिकाना हक की अनिवार्यता
पीएम किसान योजना के नियमों में साफ लिखा है कि लाभ केवल उन किसानों को मिलेगा जिनके नाम पर कृषि भूमि दर्ज हो। ‘स्वामित्व’ यानी ओनरशिप ही इस योजना की सबसे बड़ी शर्त है।
अगर कोई किसान सिर्फ मौखिक समझौते पर या पारिवारिक व्यवस्था के तहत किसी की जमीन जोत रहा है, लेकिन जमीन उसके नाम पर नहीं है, तो वह इस योजना में रजिस्टर्ड नहीं हो सकता। कई जगह यह गलतफहमी भी देखने को मिलती है कि “हम तो खेती करते हैं, हमें भी किसान माना जाना चाहिए।” किसान तो जरूर माने जाएंगे, लेकिन इस खास योजना में लाभ वही ले सकता है जो कागजों में जमीन का मालिक हो।
संस्थागत भूमि धारकों को भी लाभ नहीं
सिर्फ बटाईदार ही नहीं, बल्कि कई अन्य श्रेणियों को भी पीएम किसान योजना से बाहर रखा गया है। यदि खेती की जमीन किसी संस्था, ट्रस्ट, कंपनी, सहकारी समिति या अन्य ‘संस्थागत’ नाम से दर्ज है, तो ऐसी भूमि पर काम करने वाले लोगों को भी योजना का लाभ नहीं मिलता। इसका मतलब यह है कि यह योजना मुख्य रूप से व्यक्तिगत किसानों के लिए बनाई गई है, किसी संस्था या संगठन के लिए नहीं।
कौन-कौन हैं अपात्र किसान?
योजना का फायदा सुनिश्चित करने के साथ-साथ सरकार ने कुछ श्रेणियों को जानबूझकर बाहर रखा है, ताकि लाभ वास्तव में जरूरतमंद और छोटे किसानों तक पहुंचे। कुछ प्रमुख अपात्र वर्ग इस प्रकार हैं:
- ऐसे किसान जो आयकर भरते हैं।
- डॉक्टर, इंजीनियर, वकील, चार्टर्ड अकाउंटेंट जैसे उच्च पेशेवर।
- सेवानिवृत्त सरकारी अधिकारी जिन्हें 10,000 रुपये से अधिक की पेंशन मिलती है।
- उच्च पदों पर रह चुके वर्तमान या पूर्व संवैधानिक पदाधिकारी।
यानी यदि कोई व्यक्ति जमीन का मालिक होने के बावजूद आर्थिक रूप से सक्षम है और पहले से अच्छी आय रखता है, तो उसे इस योजना से बाहर रखा गया है।
अगर आप पात्र हैं, तो रजिस्ट्रेशन कैसे करें?
अगर आपके नाम पर खेती योग्य जमीन है और आप ऊपर बताए गए अपात्र वर्गों में नहीं आते, तो आप पीएम किसान योजना का लाभ ले सकते हैं। इसके लिए आपको अपने राज्य के पोर्टल या सीधे PM-Kisan की आधिकारिक वेबसाइट पर जाकर पंजीकरण कराना होगा।
रजिस्ट्रेशन के लिए आम तौर पर ये दस्तावेज जरूरी होते हैं:
- आधार कार्ड
- बैंक अकाउंट की डिटेल्स
- भूमि रिकॉर्ड या खसरा-खतौनी की कॉपी
- मोबाइल नंबर
कई राज्यों में CSC सेंटर, कृषि कार्यालय या पटवारी/लेखपाल के जरिए भी आवेदन किया जा सकता है। रजिस्ट्रेशन के बाद आपका डेटा वेरिफाई होता है, और स्वीकृत होने पर आपकी किस्त बैंक खाते में आने लगती है।
आगे के लिए क्या उम्मीद की जाए?
बटाईदार किसानों के लिए यह स्थिति वाकई मुश्किल है क्योंकि वे वास्तविक खेती तो करते हैं, लेकिन कागजों में मालिक नहीं दिखते। कई किसान संगठन लंबे समय से मांग कर रहे हैं कि बटाईदारों को भी किसी न किसी रूप में योजना के दायरे में लाया जाए या उनके लिए अलग से योजना बनाई जाए।
फिलहाल जब तक नियमों में बदलाव नहीं होता, तब तक बटाईदार किसानों को पीएम किसान योजना का सीधा लाभ नहीं मिलेगा। ऐसे में जिन किसानों के पास अपने नाम पर जमीन है, उन्हें चाहिए कि वे समय रहते रजिस्ट्रेशन और डॉक्युमेंट्स सही करा लें, ताकि योजना की किस्तें समय पर मिल सकें।
















