
पीएम किसान सम्मान निधि योजना तो किसानों के लिए वरदान है ना? हर साल 6 हजार रुपये सीधे खाते में आते हैं, लेकिन अब खुलासा हो रहा है कि कुछ लोग इस अच्छी योजना का गलत फायदा उठा रहे थे। जिले में सत्यापन के दौरान जो गड़बड़ियां सामने आई हैं, वो हैरान करने वाली हैं। चलिए, इस पूरे मामले को समझते हैं, बिना किसी पुरानी खबर के सहारे, बस ताजा जांच के आधार पर।
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मृत पिता के खाते में भी पहुंचती रही किस्तें
सबसे चौंकाने वाली बात तो ये निकली कि 5,684 किसानों के पिता स्वर्ग सिधार चुके थे, लेकिन उनकी किस्तें बंद नहीं हुईं। पिता का खाता चालू रहा और पुत्र ने वरासत लेते ही खुद का नाम भी दर्ज करा लिया। नतीजा? दोहरी किस्तें हजम! सोचिए, पिता गुजर गए, लेकिन पैसे आते रहे, ऊपर से बेटा भी लेता रहा। ये कितना गलत है भाई! अब इनकी पेंशन रोक दी गई है और जो पैसा लिया गया, उसकी वसूली होगी।
पति-पत्नी की जोड़ी ने मारी दोहरी चौका
अब सुनिए पति-पत्नी का खेल। 12,430 जोड़ियां ऐसी मिलीं जहां दोनों अलग-अलग लाभ ले रहे थे। एक खाते में पति की किस्त, दूसरे में पत्नी की। नियम तो साफ है – एक परिवार से सिर्फ एक ही व्यक्ति को मिलना चाहिए। लेकिन इन लोगों ने सालों तक दोनों तरफ से लूट मचाई। सत्यापन में 12,193 केस कन्फर्म हो चुके, 237 के नाम पोर्टल पर गायब। अब दोनों की किस्तें बंद, सिर्फ एक को मिलेगी। अगर दो साल तक लिया तो अगले दो साल कोई किस्त नहीं। रिकवरी का जिम्मा भी तय!
नाबालिगों के खाते में भी आ रही थी किसान निधि
ये तो और भी शॉकिंग है – 542 नाबालिग बच्चों के नाम पर किस्तें जा रही थीं! बच्चे जो अभी स्कूल जाते हैं, उनके खाते में 2-2 हजार की किस्तें। ये कैसे संभव हुआ? शायद किसी ने फर्जी तरीके से नाम दर्ज करा दिया। इतने छोटे बच्चों को योजना का लाभ मिलना तो अच्छा है, लेकिन नियमों का उल्लंघन बर्दाश्त नहीं। इनकी भी पेंशन रोकी गई है।
नई जमीन खरीदकर क्रेता-बिक्रेता दोनों ने ठगा
2019 के बाद जमीन खरीदने वालों में 6,093 लोग ऐसे पकड़े गए जहां क्रेता और बिक्रेता दोनों ही एक ही जमीन पर किसान निधि ले रहे थे। जमीन बिक गई, लेकिन लाभ बंद नहीं हुआ। बिक्रेता को मिलती रही, ऊपर से खरीदार ने भी नाम दर्ज करा लिया। ये तो साफ धोखा है!
इसी तरह, 27,859 किसानों को वरासत में जमीन मिली, लेकिन निधि दो जगह पहुंच रही थी। एक तरफ पुराना मालिक, दूसरी तरफ वारिस – दोनों खाते भरे जाते रहे।
जिले भर में भेजी गई 5 लाख से ज्यादा किस्तें
जिले में कुल 5,45,404 किसान लाभ ले रहे थे। आधार कार्ड से शासन स्तर पर जांच हुई तो 42,662 संदिग्ध पाए गए। इनकी किस्तें रोकी गईं और कृषि विभाग को सौंपा गया। उप कृषि निदेशक के नेतृत्व में तहसीलवार टीमें बनीं, जिन्होंने जमकर जांच की। अब पेंशन बंद हैं, रिकवरी की तैयारी जोरों पर।
देखिए भाई, ये योजना गरीब किसानों के लिए बनी है, लेकिन कुछ लोग लालच में इसे कलंक बना रहे हैं। सरकार ने साफ कर दिया – गलत फायदा लिया तो चुकाना पड़ेगा। अगर आप लाभार्थी हैं तो अपना पोर्टल चेक कर लीजिए, कहीं गड़बड़ तो नहीं। सत्यापन से लाखों का खेल रुका, बाकी सच्चे किसानों को फायदा मिलेगा।
















