
उत्तर प्रदेश सरकार ट्रैफिक को सुगम बनाने के लिए कमर तोड़ रही है, खासकर गोरखपुर जैसे जिलों में जहां रोजाना हजारों गाड़ियां जाम में फंस जाती हैं। अच्छी खबर ये है कि पानीपत-गोरखपुर एक्सप्रेसवे को अब कुशीनगर तक बढ़ा दिया गया है। ये करीब 750 किलोमीटर लंबा प्रोजेक्ट यात्रियों को तेज रफ्तार देगा।
NHAI की टीम सर्वे में जुट गई है, और जल्द ही नक्शा तैयार होकर मंत्रालय को भेजा जाएगा। बजट स्वीकृति के बाद जमीन अधिग्रहण और निर्माण की रफ्तार पकड़ेगा। सोचिए, शामली से कुशीनगर तक का सफर कितना आसान हो जाएगा!
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सर्वे का काम जोरों पर, पिलर लगे नजर आ रहे
गोरखपुर के पीपीगंज इलाके में एलाइनमेंट सर्वे पूरा होने के बाद पत्थर लगाने का काम तेजी से चल रहा है। नयनसर टोल प्लाजा के पास ये एक्सप्रेसवे गोरखपुर-सोनौली नेशनल हाईवे को क्रॉस करेगा। NHAI वाले पिलर रंग रहे हैं और जीयो-टैगिंग करवा रहे हैं, ताकि ट्रैकिंग आसान रहे। कुशीनगर-पानीपत एक्सप्रेसवे की लंबाई भी कमाल की है – संत कबीर नगर में 22.50 किमी, गोरखपुर में 34 किमी और कुशीनगर में 3 किमी। ये सब देखकर लगता है, प्रोजेक्ट पटरी पर है और जल्द रोड पर गाड़ियां दौड़ेंगी।
सिलीगुड़ी कनेक्शन से बनेगा सुपर कॉरिडोर
सबसे रोमांचक बात तो ये कि कुशीनगर में ये एक्सप्रेसवे सिलीगुड़ी एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। पहले प्लान था गोरखपुर-शामली तक, फिर पानीपत तक बढ़ाया गया, और अब कुशीनगर का कनेक्शन जोड़ दिया। ग्रीनफील्ड प्रोजेक्ट होने से नया रास्ता बनेगा, बिना पुरानी सड़कों को छुए। पर्यावरण का भी पूरा ख्याल रखा जा रहा है – सर्वे में कम से कम पेड़ काटने पर जोर है। एलाइनमेंट चुनते वक्त विशेषज्ञ हर कोण से सोच रहे हैं, ताकि जंगल कम प्रभावित हों। ये कदम पूर्वी UP को देश के बाकी हिस्सों से जोड़ेगा, व्यापार और पर्यटन दोनों को बूस्ट मिलेगा।
इन जिलों से गुजरेगा मेगा हाईवे
ये एक्सप्रेसवे कुशीनगर से शुरू होकर गोरखपुर, संत कबीर नगर, सिद्धार्थनगर, बलरामपुर, श्रावस्ती, बहराइच, लखनऊ, सीतापुर, हरदोई, शाहजहांपुर, बदायूं, रामपुर, बरेली, संभल, अमरोहा, मेरठ, बिजनौर, सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, शामली और पानीपत तक फैलेगा। इतने जिलों को कवर करने वाला ये रोड पूर्वांचल को दिल्ली-एनसीआर से सीधा जोड़ेगा। कल्पना कीजिए, गोरखपुर से पानीपत सिर्फ कुछ घंटों में! लखनऊ जैसे शहरों से होकर गुजरने से लोकल इकोनॉमी को भी झटका लगेगा – नए बिजनेस, जॉब्स सब बढ़ेंगे। लेकिन चुनौतियां भी हैं, खासकर जमीन के मामले में।
किसानों की परेशानी और मुआवजे की मांग
प्रोजेक्ट की सबसे बड़ी हिचकी है जमीन अधिग्रहण। किसान चिंतित हैं क्योंकि 2016 के बाद सर्किल रेट नहीं बढ़ा, जबकि बाजार में जमीन की कीमत 10 गुना उछल चुकी है। उनकी मांग साफ है – अगर किसी की जमीन 40 एकड़ से कम है, तो उसे आवासीय दर पर मुआवजा मिले। SDM कैंपियरगंज सिद्धार्थ पाठक का कहना है कि एलाइनमेंट तय हो गया है, लेकिन गजट नोटिफिकेशन बाकी है।
गजट के बाद सब साफ हो जाएगा। नियम के मुताबिक, नगरीय इलाके में सर्किल रेट का दोगुना और ग्रामीण क्षेत्र में चार गुना मुआवजा मिलेगा। किसानों की बात सुनकर लगता है, सरकार को जल्द समाधान निकालना चाहिए, वरना देरी हो सकती है।
भविष्य की उम्मीदें
कुल मिलाकर, पानीपत-कुशीनगर एक्सप्रेसवे UP के ट्रांसपोर्टेशन को नई ऊंचाई देगा। NHAI अधिकारी तेजी से काम कर रहे हैं, सर्वे से लेकर बजट तक सब ट्रैक पर है। किसानों की चिंताओं का समाधान हो जाए, तो ये प्रोजेक्ट मील का पत्थर साबित होगा। गोरखपुर और आसपास के लोग बेचैन हैं – कब खुलेगी ये सुपरफास्ट लेन? जल्द ही ये हकीकत बनेगी, और यात्रा मजेदार हो जाएगी। सरकार का ये प्रयास पूर्वी UP को विकास की मुख्यधारा से जोड़ेगा।
















