
हर साल 10 जनवरी को मनाए जाने वाले विश्व हिंदी दिवस पर दुनिया भर में हिंदी की वैश्विक महत्ता को रेखांकित किया जाता है। 1975 में नागपुर में आयोजित पहले विश्व हिंदी सम्मेलन से प्रेरित यह दिवस हिंदी को अंतरराष्ट्रीय मंच पर स्थापित करने का प्रतीक है। इस बार हम हिंदी भाषा की अनूठी शक्ति को समझने के लिए उसके सबसे लंबे और कठिन शब्द पर नजर डालेंगे- ‘लौहपथगामिनीसूचकदर्शकहरितताम्रलौहपट्टिका‘।
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विश्व हिंदी दिवस का ऐतिहासिक महत्व
विश्व हिंदी दिवस की शुरुआत 10 जनवरी 1975 को महाराष्ट्र के नागपुर में पहले विश्व हिंदी सम्मेलन से हुई, जहां 30 देशों के 122 प्रतिनिधियों ने भाग लिया। भारत सरकार ने 2006 में इसे आधिकारिक रूप से घोषित किया, ताकि विदेशों में बसे हिंदी भाषियों को एकजुट किया जा सके। इसका उद्देश्य हिंदी को वैश्विक भाषा के रूप में स्थापित करना और इसकी सांस्कृतिक समृद्धि को फैलाना है। दुनिया की चौथी सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा हिंदी को लगभग 53 करोड़ भारतीय और वैश्विक स्तर पर हर छठा व्यक्ति समझता या बोलता है।
हिंदी भारत की राजभाषा है, जो केंद्र सरकार के कामकाज की भाषा है। देवनागरी लिपि में लिखी जाने वाली यह भाषा विविध संस्कृतियों को जोड़ने का सेतु है। इसका इतिहास 1000 वर्ष से अधिक पुराना है, जो संस्कृत और अपभ्रंश से निकला है।
हिंदी का सबसे लंबा शब्द
हिंदी की समास और संधि नियमों की बदौलत भाषा में विशाल शब्द बनाए जा सकते हैं। सबसे लंबा शब्द ‘लौहपथगामिनीसूचकदर्शकहरितताम्रलौहपट्टिका’ है, जिसमें 24 व्यंजन और 10 मात्राएं हैं – कुल 34 अक्षर। इसका ब्रेकडाउन इस प्रकार है:
| भाग | अर्थ |
|---|---|
| लौहपथगामिनी | लोहे की पटरियों पर चलने वाली गाड़ी (रेलगाड़ी) |
| सूचकदर्शक | संकेत दिखाने वाला |
| हरितताम्रलौहपट्टिका | हरा-तांबे लोहे का तख्ता |
कुल मिलाकर इसका अर्थ है “रेल पटरियों के किनारे लगा हरा-पीला लोहे का संकेतक बोर्ड”। यह रेलवे के उन हरे-तांबे रंग के बोर्डों को संदर्भित करता है जो दिशा या चेतावनी देते हैं।
उच्चारण की चुनौती
उच्चारण: लौह-पथ-गा-मी-नी-सू-चक-दर्श-क-हरि-ता-म्र-लौह-पट्-टी-का। इसकी लंबाई और जटिल संयोजन के कारण अच्छे-अच्छे हिंदी प्रेमी भी पसीना छूटने लगता है। सोशल मीडिया पर वीडियो वायरल होते हैं जहां लोग इसे बोलने की कोशिश करते हैं। यह शब्द हिंदी की लचीलापन दर्शाता है, लेकिन रोजमर्रा में शायद ही इस्तेमाल हो।
हिंदी के अन्य कठिन शब्द
लंबाई के अलावा हिंदी में अर्थ की गहराई वाले कठिन शब्द भी हैं। ‘किंकर्तव्यविमूढ़’ का अर्थ है वह व्यक्ति जो दुविधा में फंसकर निर्णय न ले पाए – जैसे ‘क्या करूं?’ सोचते रहना। अन्य उदाहरण: ‘गवेषणोन्मुखात्मक’ (अन्वेषण की ओर उन्मुख) और ‘अन्यमनस्क’ (मन का कहीं और होना)। ये शब्द हिंदी की समृद्धि को प्रमाणित करते हैं।
हिंदी का वैश्विक भविष्य
विश्व हिंदी दिवस पर संयुक्त राष्ट्र में हिंदी का इस्तेमाल (1949 से पहली बार 10 जनवरी को) याद किया जाता है। 2026 की थीम अभी घोषित नहीं, लेकिन यह हिंदी के डिजिटल युग में विस्तार पर केंद्रित हो सकती है। हिंदी भाषा प्रेमी इन शब्दों से प्रेरणा लें और अपनी मातृभाषा को मजबूत करें।
















