
दोस्तों, उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता (UCC) लागू होते ही सरकार ने शादियों के पंजीकरण पर सख्ती बरतनी शुरू कर दी है। अगर आपकी शादी 2010 से 2025 के बीच हुई है, तो अब देर न करें। UCC के तहत ये अनिवार्य हो गया है, वरना सरकारी योजनाओं में दिक्कत हो सकती है। चलिए, सरल भाषा में सब समझते हैं।
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UCC का नया नियम
UCC लागू होने से उत्तराखंड देश का पहला राज्य बन गया जहां सभी धर्मों के लिए एक समान कानून है। पुरानी शादियों – यानी 2010 के बाद की – का पंजीकरण अब हर हाल में कराना पड़ेगा। सरकार ने 6 महीने का समय दिया है, ताकि लोग आसानी से दस्तावेज जमा कर सकें। ये कदम कानूनी विवादों को कम करने और पारदर्शिता लाने के लिए है। अगर आपने अभी तक नहीं कराया, तो आज ही प्लान बनाएं।
समय सीमा क्या है?
नियम साफ है – UCC के लागू होने के 6 महीने के अंदर पंजीकरण पूरा करें। ये सभी समुदायों पर बराबर लागू होता है, चाहे हिंदू हो या मुस्लिम, ईसाई हो या कोई और। समय बीतने पर सरकारी सुविधाएं जैसे राशन कार्ड, पेंशन या अन्य योजनाओं में समस्या आ सकती है। मेरी सलाह? घर के कागजात निकालें और जल्दी काम शुरू करें, वरना बाद में पछतावा होगा।
देर करने पर कितना खर्च?
अगर 6 महीने के बाद पंजीकरण कराते हैं, तो जुर्माना लगेगा। राशि तय नहीं है, लेकिन ये आर्थिक बोझ डाल सकता है। सरकार का मकसद लोगों को समय पर प्रेरित करना है। कई लोग सोचते हैं कि ‘अभी तो चलेगा’, लेकिन UCC में कोई ढील नहीं। बेहतर है पहले ही क्लियर कर लें, ताकि कोई टेंशन न रहे।
ऑनलाइन पंजीकरण कैसे करें?
सबसे अच्छी बात – सब ऑनलाइन हो गया! उत्तराखंड सरकार के विवाह पंजीकरण पोर्टल पर जाएं। आधार कार्ड, शादी का कार्ड, दो गवाहों के दस्तावेज, फोटो और अन्य जरूरी कागज अपलोड करें। फॉर्म भरें, सबमिट करें और रसीद डाउनलोड कर लें। 10-15 मिनट का काम, लेकिन फायदा जिंदगी भर। अगर इंटरनेट की दिक्कत हो, तो नजदीकी तहसील या कॉमन सर्विस सेंटर जाएं।
जरूरी दस्तावेज
पंजीकरण के लिए ये चीजें चाहिए:
- दोनों पति-पत्नी के आधार कार्ड
- शादी का प्रमाण-पत्र या फोटो/कार्ड
- दो गवाहों के आईडी प्रूफ
- पासपोर्ट साइज फोटो
- अगर नाम में अंतर हो, तो अफिडेविट
सब सही रखें, वरना आवेदन रिजेक्ट हो सकता है। पोर्टल पर चेकलिस्ट भी मिलेगी। अगर शादी कोर्ट मैरिज है, तो वो अलग से अपलोड करें।
सरकार का मकसद
UCC से महिलाओं के अधिकार मजबूत होंगे, संपत्ति विवाद कम होंगे। पुरानी शादियां रजिस्टर होने से तलाक या उत्तराधिकार के केस आसान हो जाएंगे। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की सरकार इसे पारदर्शी बनाने पर जोर दे रही है। लाखों परिवार इससे फायदा लेंगे।
क्या करें अब?
- पोर्टल चेक करें: uk.gov.in या UCC पोर्टल सर्च करें।
- दस्तावेज इकट्ठा करें।
- ऑनलाइन अप्लाई करें।
- स्टेटस ट्रैक करें।
- सर्टिफिकेट प्रिंट लें।
अगर उम्रदराज माता-पिता की शादी है, तो बच्चे उनकी मदद करें। ग्रामीण इलाकों में जागरूकता कैंप भी लग रहे हैं।
अंतिम टिप: आज ही एक्शन लें!
दोस्तों, ये नियम आपके हित में है। कानूनी झंझटों से बचें, परिवार को मजबूत बनाएं। 6 महीने कम हैं, तो कल से शुरू करें। कोई डाउट हो तो हेल्पलाइन नंबर चेक करें। UCC उत्तराखंड को नई दिशा दे रहा है, आप भी हिस्सा बनें!
















