
दोस्तों, जीवन में कभी-कभी ऐसी विपत्तियाँ आ जाती हैं जब परिवार का इकलौता कमाने वाला चला जाता है। कल्पना कीजिए, एक मजदूर या छोटा व्यापारी, जो दिन-रात मेहनत करके घर चलाता है, अचानक इस दुनिया से विदा हो जाए। उसके पीछे रह जाते हैं बूढ़े माता-पिता, छोटे बच्चे या पत्नी, जो आर्थिक तंगी से जूझने लगते हैं।
ऐसे में उत्तर प्रदेश सरकार ने एक ऐसी योजना शुरू की है जो इन परिवारों को तुरंत आर्थिक सहायता देती है। इसका नाम है नेशनल फैमिली बेनिफिट स्कीम (एनएफबीएस)। इस योजना के तहत परिवार को 30,000 रुपये की एकमुश्त मदद मिलती है। यह राशि छोटी लग सकती है, लेकिन मुश्किल वक्त में यह किसी वरदान से कम नहीं। आइए, इस योजना को विस्तार से समझते हैं, ताकि आप या आपके परिचित जरूरतमंद परिवार इसका फायदा उठा सकें।
Table of Contents
योजना का उद्देश्य
सच कहें तो यह योजना गरीबी रेखा से नीचे जीवन यापन करने वाले परिवारों के लिए वरदान है। अगर परिवार में सिर्फ एक ही व्यक्ति कमाई करता हो और उसकी अचानक मौत हो जाए, तो सरकार तुरंत 30 हजार रुपये की सहायता देती है। यह पैसे परिवार के खाते में सीधे ट्रांसफर हो जाते हैं, जिससे तात्कालिक खर्चे जैसे दवा-दारू, बच्चों की पढ़ाई या घर का गुजारा चल सके।
मैंने खुद कई ऐसे परिवार देखे हैं, जहाँ मुखिया की मौत के बाद सब कुछ उलट-पुलट हो जाता है। यह योजना ठीक वैसी ही मदद करती है, जैसे कोई करीबी हाथ बढ़ा दे। याद रखिए, यह योजना राष्ट्रीय स्तर पर चलती है, लेकिन उत्तर प्रदेश में इसके तहत राज्य के नागरिकों को प्राथमिकता मिलती है।
कौन ले सकता है लाभ?
अब सवाल आता है, हर कोई इस योजना का फायदा नहीं ले सकता। इसके लिए कुछ सख्त शर्तें हैं, जो सुनिश्चित करती हैं कि मदद सही जगह पहुँचे। सबसे पहले, मृतक मुखिया की उम्र 18 से 60 वर्ष के बीच होनी चाहिए। यानी, अगर कमाने वाला जवान था और अभी परिवार का बोझ उठा रहा था, तो ही यह लागू होता है। दूसरा, परिवार की सालाना आय ग्रामीण क्षेत्रों में 46,000 रुपये से ज्यादा नहीं होनी चाहिए। शहरी इलाकों में यह सीमा 56,000 रुपये है। अगर आपका परिवार इन आय सीमाओं में आता है और मुखिया की मौत साबित हो जाती है, तो बधाई हो – आप पात्र हैं!
ये नियम इसलिए हैं ताकि वाकई जरूरतमंदों तक मदद पहुँचे। मिसाल के तौर पर, गाजियाबाद या लखनऊ जैसे शहरों में रहने वाले कई परिवार इसकी जाँच करवा रहे हैं। अगर आपका परिवार गरीबी रेखा के नीचे है, तो यह आपके लिए सुनहरा मौका है। बस, फर्जी दस्तावेजों से बचें, क्योंकि जाँच सख्त होती है।
जरूरी दस्तावेज
योजना का लाभ लेने के लिए दस्तावेजों की लिस्ट लंबी है, लेकिन इन्हें जुटाना मुश्किल नहीं। आपको चाहिए – आधार कार्ड, पहचान पत्र (जैसे वोटर आईडी या राशन कार्ड), निवास प्रमाण पत्र, मुखिया का मृत्यु प्रमाण पत्र, बैंक खाते की पासबुक या कैंसिल्ड चेक, मोबाइल नंबर, मुखिया का आयु प्रमाण पत्र (जन्म प्रमाण पत्र या स्कूल सर्टिफिकेट), और पासपोर्ट साइज फोटो।
ये दस्तावेज ऑनलाइन अपलोड करने पड़ते हैं। मैं सलाह दूँगा कि सब स्कैन करके रख लें, ताकि आवेदन भरते समय झंझट न हो। खासकर ग्रामीण इलाकों में लोग अक्सर दस्तावेजों की कमी से चूक जाते हैं। अगर आपके पास मृत्यु प्रमाण पत्र नहीं है, तो तुरंत तहसील या अस्पताल से बनवा लें।
आवेदन कैसे करें?
आवेदन करना बेहद आसान है, आज के डिजिटल जमाने में। सबसे पहले वेबसाइट nfbs.upsdc.gov.in पर जाएँ। वहाँ होम पेज पर एनएफबीएस का सेक्शन मिलेगा। ‘नया आवेदन’ पर क्लिक करें और फॉर्म भरें। व्यक्तिगत जानकारी, परिवार की आय, मुखिया की डिटेल्स और दस्तावेज अपलोड करें। सबमिट करने के बाद एक ट्रैकिंग आईडी मिलेगी।
सरकार की टीम जाँच करेगी – यह 15-30 दिनों में हो जाती है। अगर सब ठीक रहा, तो पैसे सीधे बैंक में आ जाएँगे। अगर रिजेक्ट हो जाए, तो कारण बताया जाएगा और अपील का मौका मिलता है। मैंने सुना है, कई लोगों ने मोबाइल से ही अप्लाई कर लिया। अगर इंटरनेट की दिक्कत हो, तो नजदीकी कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) पर जाकर मदद लें।
क्यों है यह योजना खास?
एनएफबीएस जैसी योजनाएँ सरकार की संवेदनशीलता दिखाती हैं। उत्तर प्रदेश जैसे बड़े राज्य में लाखों परिवार इससे लाभान्वित हो चुके हैं। यह न सिर्फ आर्थिक मदद देती है, बल्कि परिवार को नई शुरुआत का हौसला भी। लेकिन याद रखें, समय पर अप्लाई करें, क्योंकि मुखिया की मौत के बाद 6 महीने का समय होता है। अगर आप गाजियाबाद या यूपी के किसी कोने से हैं, तो आज ही चेक करें। हेल्पलाइन नंबर या ईमेल से भी संपर्क कर सकते हैं। जीवन अनिश्चित
















