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दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किसके पास! चीन और रूस को पीछे छोड़ने की तैयारी में RBI, देखें लेटेस्ट रैंकिंग।

RBI ने गोल्ड रिज़र्व में जबरदस्त उछाल के साथ चीन और रूस को पीछे छोड़ दिया। लेटेस्ट वर्ल्ड रैंकिंग में भारत टॉप-3 में! क्या आप जानते हैं नई लिस्ट? जल्दी देखें पूरी डिटेल, सरप्राइज गारंटीड!

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दुनिया भर के केंद्रीय बैंक सोने के भंडार बढ़ाने में जुटे हैं। आम लोग तो बस चमकती कीमतों पर नजर रख रहे हैं, लेकिन ये खरीदारी आने वाले बड़े बदलावों की ओर इशारा कर रही हो सकती है। आखिर क्यों देश अपनी तिजोरियां सोने से भर रहे हैं, और भारत इस दौड़ में कहां ठहरा है।

दुनिया में सबसे ज्यादा सोना किसके पास! चीन और रूस को पीछे छोड़ने की तैयारी में RBI, देखें लेटेस्ट रैंकिंग।

सोने का भंडार क्या होता है?

किसी देश का सोने का भंडार वही सोना है जो उसके केंद्रीय बैंक या सरकार सुरक्षित रखती है। ये आर्थिक मुश्किलों के समय सहारा बनता है, मुद्रा पर भरोसा बढ़ाता है और जरूरत पड़ने पर विदेशी भुगतान का जरिया होता है। बाजार में उतार-चढ़ाव या संकट में ये स्थिरता का प्रतीक है। ज्वेलरी या सजावट के लिए ये नहीं रखा जाता।

दुनिया के सबसे बड़े सोने वाले देश

सबसे आगे अमेरिका है जिसके पास 8100 टन से ज्यादा सोना जमा है। ज्यादातर ये फोर्ट नॉक्स जैसे मजबूत किलों में बंद रहता है। उसके पीछे जर्मनी लगभग 3350 टन के साथ खड़ा है। इटली और फ्रांस के पास 2400-2500 टन सोना है। रूस और चीन ने हाल के सालों में तेजी से बढ़ोतरी की है, दोनों के पास अब 2300 टन के करीब पहुंच गया।

स्विट्जरलैंड, जापान और भारत 800 से 1000 टन की रेंज में आते हैं। भारत का आधिकारिक सोना 800-900 टन बताया जाता है। ये टॉप 10 में जगह तो दिलाता है, लेकिन देश की बड़ी आबादी और सोने की भारी खपत के मुकाबले ये बहुत ज्यादा नहीं।

देशसोना (टन)
अमेरिका8133
जर्मनी3352
इटली2452
फ्रांस2437
रूस2333
चीन2262
भारत822

हाल के सालों में तेज खरीदारी

पिछले दशक से केंद्रीय बैंक आक्रामक रूप से सोना खरीद रहे हैं। 2022 और 2023 में 1000 टन से ज्यादा सोना बाजार से उठा लिया गया। ये रिकॉर्ड स्तर है। रूस ने पश्चिमी दबावों के बाद डॉलर से दूरी बनाने के लिए सोना बढ़ाया। चीन ने भी लगातार महीनों तक अपने भंडार जमा किए।

तुर्की, पोलैंड, कजाकिस्तान और कतर जैसे देश भू-राजनीतिक जोखिमों से बचने के लिए आगे बढ़े। पूर्व सोवियत देश भी सक्रिय दिखे। अब सोना सिर्फ मुनाफे के लिए नहीं, बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा का हथियार बन गया।

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कीमतें क्यों आसमान छू रही हैं

सोने की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हैं। रूस-यूक्रेन संघर्ष, मध्य पूर्व का तनाव और ताइवान विवाद ने निवेशकों को सुरक्षित ठिकाने की तलाश में धकेल दिया। मुद्रास्फीति और मंदी का साया भी है। कागजी संपत्तियां जोखिम भरी लग रही हैं, इसलिए सोना पसंद किया जा रहा।

केंद्रीय बैंकों की भारी खरीदारी से बाजार में सोने की कमी हो गई। सप्लाई कम होने से दाम चढ़े। डॉलर पर कम निर्भरता की कोशिशें भी असर डाल रही हैं।

भारत का सोना प्रेम और चुनौतियां

भारत सोने का सबसे बड़ा खरीदार देश है। शादियां, त्योहार और परंपराएं इसे संस्कृति का हिस्सा बनाती हैं। लेकिन आधिकारिक भंडार कुल विदेशी मुद्रा का छोटा सा हिस्सा है। आयात बिल बढ़ता जाता है, रुपया दबाव में आता है।

सरकार गोल्ड बॉन्ड, ईटीएफ और हॉलमार्किंग से लोगों को भौतिक सोने से दूर कर रही। हाल में खरीदारी बढ़ी है, लेकिन रणनीति अभी संभलकर चल रही। रीसाइक्लिंग और डिजिटल विकल्पों को बढ़ावा जरूरी।

आगे की राह क्या है?

भू-राजनीतिक तनाव अगर बने रहे तो सोने की मांग रुकेगी नहीं। भारत को भंडार बढ़ाने, स्थानीय रीसाइक्लिंग को प्रोत्साहन और वित्तीय उत्पादों को मजबूत करना होगा। सोना गहना नहीं रह गया, ये आर्थिक ढाल है। भारत का प्यार तो है, तैयारी तेज करनी पड़ेगी। आपकी राय में भारत कितना आक्रामक हो।

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info@dietjjr.in

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