
यह खबर सुनकर तो दिल बैठ गया! कल यानी 30 जनवरी को सोने-चांदी के बाजार में ऐसा धमाका हुआ कि निवेशकों के होश उड़ गए। जो धातुएं पिछले दिनों आसमान छू रही थीं, वो शुक्रवार को जमीन पर आ टिक गईं। वायदा बाजार में कोहराम मच गया, और कीमतें ऐसी लुढ़कीं मानो कोई भूकंप आ गया हो। आइए, इस गिरावट की पूरी कहानी समझते हैं, बिना किसी जल्दबाजी के।
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कीमतों में आई भारी गिरावट, रिकॉर्ड तोड़ दी
सोचिए, गुरुवार को चांदी 4 लाख 20 हजार के पार उछली थी, और अगले ही दिन 17 फीसदी की चोट खाकर 3 लाख 32 हजार रुपये प्रति किलोग्राम पर सांस लेने लगी। यानी एक झटके में 67,891 रुपये की चांदी गायब! MCX पर मार्च डिलीवरी वाली चांदी ने ऐसा लोअर सर्किट हिट किया कि ट्रेडर्स के चेहरे पीले पड़ गए। सोना भी पीछे न रहा, फरवरी डिलीवरी वाला सोना 9 फीसदी यानी 15,246 रुपये फिसलकर 1 लाख 54 हजार 157 रुपये प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ। गुरुवार को ये 1 लाख 80 हजार के रिकॉर्ड पर था, लेकिन मुनाफावसूली ने सब बहा दिया। ये कई महीनों की सबसे बड़ी एकदिनी गिरावट है भाई, ऐसा दुर्लभ नजारा!
निवेशकों ने क्यों बेचना शुरू कर दिया?
अब सवाल ये कि आखिर ये हंगामा क्यों? ऊंचे दामों पर खरीदे सामान को देखते ही निवेशक भागे, मुनाफा काटने। वैश्विक बाजार कमजोर पड़े थे, और अमेरिकी डॉलर ने कमर कस ली। डॉलर इंडेक्स 0.33 फीसदी चढ़कर 96.60 पर पहुंचा, जो सोने-चांदी की दुश्मन है। घरेलू बाजार में गोल्ड और सिल्वर ETF की कीमतें तो 20 फीसदी तक धड़ाम! विशेषज्ञ मानव मोदी ने साफ कहा – मेगा और मिनी कॉन्ट्रैक्ट्स सब लोअर सर्किट में। ETF में तो वायदा बाजार से भी ज्यादा मार पड़ी। ये सब ऊंचाई से डरने वाले निवेशकों का कमाल लगता है।
अमेरिका की राजनीति ने बढ़ाई मुसीबत
दूर अमेरिका में क्या हो रहा था? फेडरल रिजर्व के अगले चेयरमैन केविन वार्श के नाम पर अटकलें। ये पूर्व गवर्नर सख्त नीतियों के हामी हैं, डॉलर को और मजबूत करेंगे। ट्रंप साहब ने गुरुवार को ही संकेत दिया कि शुक्रवार सुबह नया चेयरमैन का ऐलान। ऐसे में डॉलर चमका, और हमारी कीमती धातुएं रोईं। विशेषज्ञ कहते हैं, सख्त मौद्रिक नीति से ब्याज दरें ऊंची जाएंगी, डॉलर मस्त रहेगा, और सोना-चांदी दबाव में। वैश्विक तनाव ने घरेलू बाजार को भी हिला दिया।
ग्लोबल बाजार में भी मचा बवाल
बात सिर्फ भारत की नहीं, कॉमेक्स पर भी तूफान! मार्च चांदी 19.30 डॉलर यानी 16.87 फीसदी गिरकर 95.12 डॉलर प्रति औंस पर। गुरुवार को 121.78 डॉलर का रिकॉर्ड तोड़ा था, लेकिन शुक्रवार को नया निचला स्तर। सोना अप्रैल डिलीवरी वाला 392.1 डॉलर यानी 7.32 फीसदी नीचे, 4,962.7 डॉलर प्रति औंस। गुरुवार का 5,626.8 डॉलर का ऑल-टाइम हाई अब इतिहास बन गया। पूरी दुनिया में बिकवाली का सिलसिला, डॉलर की चमक ने सबको मात दे दी।
आगे क्या हो सकता है, सावधान रहें
ये गिरावट निवेशकों को सबक दे गई – बाजार में उतार-चढ़ाव तो चलता ही है। लेकिन सख्त फेड पॉलिसी, मजबूत डॉलर और मुनाफावसूली से अभी दबाव बरकरार रह सकता है। अगर वार्श चेयरमैन बने, तो डॉलर और चढ़ेगा। फिर भी, लॉन्ग टर्म में सोना-चांदी सुरक्षित लगते हैं। सलाह यही है, जल्दबाजी न करें, ट्रेंड देखें। छोटे निवेशक खासकर सतर्क रहें। बाजार unpredictable है, लेकिन अवसर भी छिपे हैं।
















