
विदेशी सरजमीं से लेकर भारत के कोनों तक, दुनिया में कुछ ऐसी जगहें मौजूद हैं जहाँ सत्ता की बागडोर पूरी तरह महिलाओं के हाथ में है, इन ‘फीमेल आइलैंड्स’ और गांवों में पुरुषों का प्रवेश या तो वर्जित है या उनकी भूमिका नगण्य है।
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केन्या का उमोजा गांव: कांटों के बीच बसी महिलाओं की सुरक्षित दुनिया
अफ्रीका के केन्या में स्थित उमोजा गांव महिला सशक्तिकरण की सबसे बड़ी मिसाल है, 1990 में 15 महिलाओं के साथ शुरू हुए इस गांव में पुरुषों का प्रवेश पूरी तरह प्रतिबंधित है, यहाँ वे महिलाएं रहती हैं जो हिंसा, बलात्कार या बाल विवाह जैसी कुरीतियों से बचकर निकली हैं, यह गांव अपनी आर्थिक जरूरतों के लिए हस्तशिल्प और पर्यटन पर निर्भर है।
किहनु द्वीप: एस्टोनिया का ‘आइलैंड ऑफ वीमेन’
यूरोप के बाल्टिक सागर में बसा किहनु द्वीप मातृसत्तात्मक समाज का बेहतरीन उदाहरण है, यहाँ की संस्कृति को यूनेस्को द्वारा संरक्षित किया गया है यहाँ के पुरुष मछली पकड़ने के लिए हफ्तों तक समुद्र में रहते हैं, जिसके चलते द्वीप का शासन, खेती, और धार्मिक अनुष्ठान महिलाएं ही संभालती हैं।
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भारत में भी मौजूद हैं ‘नो-मेन’ जोन
भारत में कई ऐसे मंदिर हैं जहाँ विशेष अवसरों पर पुरुषों की एंट्री बैन रहती है:
- अट्टुकल भगवती मंदिर (केरल): यहाँ के प्रसिद्ध ‘पोंगाला’ उत्सव के दौरान लाखों महिलाएं जमा होती हैं और उस समय पुरुषों को प्रवेश की अनुमति नहीं होती।
- चक्कुलाथुकावु मंदिर (केरल): यहाँ की नारी पूजा के दौरान केवल महिलाओं को ही मंदिर परिसर में जाने का अधिकार है।
- कामाख्या मंदिर (असम): अंबुबाची मेले के दौरान कुछ खास दिनों के लिए पुरुष पुजारियों को भी गर्भगृह में जाने की अनुमति नहीं होती।
ये जगहें इस बात का प्रमाण हैं कि महिलाएं न केवल समाज को आत्मनिर्भर रुप से चला सकती हैं, बल्कि अपनी परंपराओं और सुरक्षा के लिए कड़े नियम भी बना सकती हैं।
















