
नौकरीपेशा वर्ग के लिए आने वाला समय बड़े बदलावों वाला हो सकता है, नए लेबर कोड और ईपीएफओ के संभावित बदलावों से कर्मचारियों की टेक-होम सैलरी से लेकर रिटायरमेंट सेविंग्स तक सब कुछ प्रभावित होने वाला है।
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लागू होगा ‘50% वेज’ नियम
नए लेबर कोड के तहत, किसी भी कर्मचारी की बेसिक सैलरी (Basic Pay) उसके कुल वेतन (CTC) का कम से कम 50% होनी अनिवार्य होगी।
- असर: वर्तमान में कई कंपनियों में भत्ते (Allowances) 70-80% तक होते हैं। नए नियम के बाद, कंपनियों को बेसिक सैलरी बढ़ानी होगी।
- इन-हैंड सैलरी पर प्रभाव: चूंकि बेसिक सैलरी बढ़ने से पीएफ (PF) और ग्रेच्युटी की कटौती बढ़ जाएगी, इसलिए कर्मचारियों की टेक-होम (हाथ में आने वाली) सैलरी कम हो सकती है। हालांकि, यह भविष्य के लिए आपकी बचत को और मजबूत बनाएगा।
EPFO वेतन सीमा (Wage Ceiling) में भारी बढ़ोतरी
सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार को ईपीएफ (EPF) की वैधानिक वेतन सीमा को वर्तमान ₹15,000 से बढ़ाने पर विचार करने के लिए मई 2026 तक का समय दिया है।
- संभावित नई लिमिट: चर्चा है कि इस सीमा को बढ़ाकर ₹21,000 या ₹25,000 प्रति माह किया जा सकता है।
- किसे होगा फायदा? इस फैसले से निजी क्षेत्र के लाखों अतिरिक्त कर्मचारी अनिवार्य पीएफ और पेंशन लाभ के दायरे में आ जाएंगे।
काम के घंटे और ओवरटाइम के नए नियम
- काम के घंटे: सामान्य कार्य दिवस 8 घंटे/दिन का रहेगा और एक सप्ताह में अधिकतम 48 घंटे काम की सीमा तय की गई है।
- डबल ओवरटाइम: यदि कोई कर्मचारी निर्धारित घंटों से अधिक काम करता है, तो उसे सामान्य वेतन से दोगुनी दर पर ओवरटाइम भुगतान करना अनिवार्य होगा।
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अन्य महत्वपूर्ण बदलाव
- ग्रेच्युटी: अब ‘फिक्स्ड टर्म’ कर्मचारियों को 5 साल के बजाय मात्र 1 साल की सेवा के बाद ही ग्रेच्युटी का लाभ मिल सकेगा PIB।
- नया इनकम टैक्स एक्ट 2025: 1 अप्रैल 2026 से नया आयकर कानून भी लागू होने की उम्मीद है, जिससे टैक्स स्ट्रक्चर में और सरलता आ सकती है।
ये बदलाव कर्मचारियों की सामाजिक सुरक्षा और रिटायरमेंट फंड को मजबूती प्रदान करने के उद्देश्य से किए जा रहे हैं, भले ही इसके कारण मासिक नकद आय (In-hand cash) में मामूली कमी आए।
















