
भाई, सोचो जरा, रिटायरमेंट के बाद की जिंदगी में हर महीने बस 1000 रुपये पेंशन मिले और दूध, दवा, सब्जी के दाम आसमान छू लें। लाखों EPS-95 पेंशनर्स यही गुजार रहे हैं। महंगाई ने तो सबको लील लिया, लेकिन इन बुजुर्गों की हालत तो और भी खराब। वे सालों से चिल्ला रहे हैं – न्यूनतम पेंशन 7500 रुपये करो! संसद में भी ये आवाज गूंजी, लेकिन केंद्र सरकार ने साफ मना कर दिया।
राज्यसभा में सांसद डॉ. मेधा कुलकर्णी ने इनकी पीड़ा बयां की। उन्होंने पूछा, महंगाई में 1000 रुपये कैसे चलेगा? महाराष्ट्र के पेंशनर्स के ज्ञापन पर क्या सोचा? लेकिन जवाब में श्रम मंत्री शोभा करंदलाजे ने कहा – फिलहाल कोई प्लान नहीं। दिल टूट गया न?
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मंत्री का सख्त रुख
मंत्री जी ने बिल्कुल साफ कहा, पेंशन बढ़ानी है तो पहले पेंशन फंड की दीर्घकालिक मजबूती देखनी पड़ेगी। बिना सोचे-समझे रकम बढ़ाई तो भविष्य के पेंशनर्स का क्या होगा? ये बात तो ठीक लगती है, लेकिन पेंशनर्स कहते हैं- हमारा आज का दर्द कौन सुनेगा? महंगाई रेट 5-6% बढ़ रही, इलाज के खर्चे दोगुने, और पेंशन वही पुरानी। मंत्री ने बताया, हर साल एक्ट्यूरियल वैल्यूएशन होती है, जिसमें आने वाले खर्च और योगदान का हिसाब लगता है। अगर फंड कमजोर पड़ा तो सब खतरे में। लेकिन भला हो सरकार का, जो अभी भी न्यूनतम 1000 रुपये सुनिश्चित कर रही है – वो भी बजट से एक्स्ट्रा सपोर्ट देकर।
EPS-95 की पूरी कहानी समझ लो
दोस्तों, EPS-95 को थोड़ा समझते हैं। ये कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) की स्कीम है, जो डिफाइंड बेनिफिट और कंट्रीब्यूशन का मिक्स है। नियोक्ता वेतन का 8.33% डालता है, केंद्र सरकार 15,000 तक के वेतन पर 1.16% देती है। इसी फंड से सबको पेंशन मिलती है। राज्यवार अलग फंड नहीं, सब राष्ट्रीय स्तर पर। महाराष्ट्र हो या बिहार, मांग एक ही – लेकिन फैसला केंद्रीय। अच्छी बात ये कि सरकार बजट से 1000 रुपये की गारंटी दे रही, वरना कईयों को और कम मिलता।
भविष्य में क्या उम्मीद?
अब उम्मीद की किरण! EPFO में बड़े बदलाव की खबरें हैं। वेतन सीमा 15,000 से 25,000 रुपये हो सकती है। इससे ज्यादा कर्मचारी कवर होंगे, फंड मजबूत बनेगा। पेंशनर्स यूनियनें चुप नहीं बैठीं, वे लगातार दबाव बना रही हैं। शायद आने वाले बजट में कुछ राहत मिले। तब तक सब्र रखो, भाइयों। सरकार को समझाना होगा कि बुजुर्गों का दर्द महंगाई से ज्यादा नहीं बढ़ना चाहिए।
पेंशनर्स के लिए सलाह
अगर आप EPS पेंशनर हैं, तो यूनियन जॉइन करो, आवाज बुलंद करो। EPFO पोर्टल चेक करो, अपना हिसाब रखो। महंगाई भत्ता (DA) बढ़ने पर पेंशन भी रिवाइज होती है। सरकार से मांगते रहो, क्योंकि वोट की ताकत है। ये लड़ाई लंबी है, लेकिन हार मत मानो। बिहार-यूपी जैसे राज्यों में लाखों प्रभावित, एकजुट हो जाओ!
















