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CBSE का बड़ा फैसला: 2026 बोर्ड परीक्षा के नियमों में भारी बदलाव! इन छात्रों को नहीं मिलेगा एडमिट कार्ड, तुरंत चेक करें नई गाइडलाइंस।

CBSE का सख्त नियम: 75% अटेंडेंस न आई तो इंटरनल असेसमेंट जीरो, बोर्ड एग्जाम से बाहर! क्लास 10-12 स्टूडेंट्स अलर्ट – स्कूल न आएंगे तो ‘Essential Repeat’, अगले साल फुल री-एग्जाम। NEP 2020 का कमाल, साल भर मेहनत जरूरी। पैरेंट्स, अभी से चेक करो!

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CBSE का बड़ा फैसला: 2026 बोर्ड परीक्षा के नियमों में भारी बदलाव! इन छात्रों को नहीं मिलेगा एडमिट कार्ड, तुरंत चेक करें नई गाइडलाइंस।

पढ़ाई का सीजन आते ही CBSE ने एक ऐसा नियम सख्त कर दिया है, जिससे लाखों स्टूडेंट्स और उनके पैरेंट्स की नींद उड़ गई है। बात साफ है, अगर बच्चा स्कूल नियमित नहीं जाएगा, तो इंटरनल असेसमेंट में दिक्कत होगी और बोर्ड एग्जाम का सपना टूट सकता है। 75% अटेंडेंस जरूरी, वरना रिजल्ट ही न बने।

NEP 2020 के तहत यह बदलाव आया है। बोर्ड का मकसद? बच्चों को साल भर मेहनत करने पर मजबूर करना। पहले अगस्त में ही सर्कुलर भेजा गया था, अब स्कूल प्रिंसिपल्स भी अलर्ट मोड में हैं। चलिए, डिटेल में समझते हैं।

75% अटेंडेंस क्यों अनिवार्य?

CBSE ने क्लास 10 और 12 के लिए 75% मिनिमम अटेंडेंस फिक्स कर दी है। मतलब, पूरे साल में 25% से ज्यादा छुट्टी नहीं। क्यों? क्योंकि:

  • इंटरनल असेसमेंट (IA) अब हर सब्जेक्ट का बड़ा हिस्सा है – प्रोजेक्ट, क्विज, क्लास टेस्ट।
  • IA के बिना फाइनल रिजल्ट कंपलीट नहीं होता।
  • कम अटेंडेंस वाले स्टूडेंट को “Essential Repeat” कैटेगरी में डाल दिया जाएगा।

यानी, फेल माने जाओगे और अगले साल सब्जेक्ट दोहराने पड़ेंगे। कोचिंग पर निर्भर रहकर घर बैठे पढ़ाई का जमाना खत्म!

इंटरनल असेसमेंट का पूरा खेल

इंटरनल असेसमेंट क्या बला है? दो साल की पढ़ाई (क्लास 11-12) में स्कूल साल भर टेस्ट लेते हैं – MCQ, प्रोजेक्ट, प्रैक्टिकल। ये नंबर फाइनल मार्कशीट में ऐड होते हैं। CBSE कहता है:

  • सिर्फ बोर्ड एग्जाम से नहीं चलेगा, कंसिस्टेंट परफॉर्मेंस जरूरी।
  • ऑनलाइन क्विज, ग्रुप एक्टिविटी से स्किल्स चेक।
  • IA मिस करने पर रिजल्ट “Incomplete” रहेगा।

स्कूलों को रिपोर्ट सबमिट करनी पड़ती है। अगर बच्चा नहीं आया, तो IA जीरो – एग्जाम में बैठने का हक ही नहीं।

कौन से स्टूडेंट्स एग्जाम से बाहर?

नए नियम साफ हैं:

  • क्लास 10: 2 से ज्यादा सब्जेक्ट्स में फेल या IA मिस? कॉम्पार्टमेंट एग्जाम नहीं, अगले साल फुल री-एग्जाम।
  • क्लास 12: 1 से ज्यादा सब्जेक्ट्स में प्रॉब्लम? वही हाल।
  • मेडिकल या फैमिली इमरजेंसी में छूट मिल सकती है, लेकिन डॉक्टर सर्टिफिकेट के साथ अप्लाई करो।

प्रिंसिपल्स बता रहे हैं – बोर्ड अब अटेंडेंस रजिस्टर चेक करेगा। कोविड टाइम की ढील खत्म, अब सख्ती फुल ऑन।

पैरेंट्स-स्टूडेंट्स के लिए क्या मतलब?

सोचिए, कोचिंग क्लासेस पर टाइम बर्बाद करने वाले बच्चे अब स्कूल प्रायोरिटी बनाएंगे। फायदे:

  • साल भर पढ़ाई की आदत पड़ेगी।
  • हॉलीडेज कम, प्रोडक्टिविटी ज्यादा।
  • स्किल्स डेवलपमेंट – सिर्फ रट्टा नहीं।

लेकिन चुनौतियां भी:

  • ग्रामीण इलाकों में ट्रांसपोर्ट इश्यू।
  • हॉस्टलर्स के लिए प्रेशर।
  • पैरेंट्स को मॉनिटरिंग बढ़ानी पड़ेगी।

टिप: स्कूल ऐप चेक करते रहो, मीटिंग्स अटेंड करो।

स्कूलों पर क्या दबाव?

प्रिंसिपल्स पर बोझ बढ़ा। CBSE सर्कुलर से:

  • 100% स्टूडेंट्स का IA कंपलीट कराओ।
  • अटेंडेंस रिपोर्ट मंथली भेजो।
  • कम अटेंडेंस पर पैरेंट्स को नोटिस।

कई स्कूल SMS भेज रहे – “आइए, नियमित रहें।” बोर्ड का मैसेज क्लियर: पढ़ाई स्कूल से शुरू होती है, कोचिंग सप्लीमेंट है।

NEP 2020 का असर

यह नियम NEP का कोर है, होलिस्टिक डेवलपमेंट। रट्टा संस्कृति खत्म, स्किल्स फोकस। भविष्य में:

  • डिजिटल अटेंडेंस।
  • AI-बेस्ड IA।
  • ग्लोबल स्टैंडर्ड्स।

स्टूडेंट्स, अभी से प्लानिंग शुरू करो। पैरेंट्स, सपोर्ट करो। 2026 बोर्ड्स में यह नियम फुल प्रभावी। क्या होगा अगर न माने? रिजल्ट डिले, करियर सेटबैक। बेहतर है, नियम मानो और आगे बढ़ो। पढ़ाई का असली मजा साल भर फैले तो आता है!

Author
info@dietjjr.in

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