
उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेसवे का जाल बिछाने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया गया है, पानीपत-गोरखपुर (शामली-पुवाया) फेज-1 एक्सप्रेसवे के निर्माण की प्रक्रिया अब जमीन पर उतरने वाली है, प्रशासन ने बिजनौर जिले में इसके लिए कमर कस ली है और कुल 131 गांवों की भूमि अधिग्रहित करने की सूची तैयार कर ली गई है।
यह भी देखें: PM Kisan Alert: यूनिक किसान ID नहीं बनी तो अटक सकती है अगली किस्त, ऐसे करें रजिस्ट्रेशन
Table of Contents
चार तहसीलों के किसान होंगे प्रभावित
यह एक्सप्रेसवे बिजनौर जिले की चार प्रमुख तहसीलों से होकर गुजरेगा, प्रशासन द्वारा जारी आंकड़ों के अनुसार, अधिग्रहण के लिए चयनित गांवों का विवरण इस प्रकार है:
- नजीबाबाद: 50 गांव
- नगीना: 38 गांव
- धामपुर: 37 गांव
- बिजनौर: 6 गांव
कुल 131 गांवों की भूमि पर एक्सप्रेसवे का निर्माण किया जाएगा। जिलाधिकारी ने संबंधित विभाग के अधिकारियों को भूमि अधिग्रहण से पहले की सभी जरूरी प्रक्रियाएं जल्द से जल्द पूरी करने के निर्देश दिए हैं।
परियोजना की मुख्य विशेषताएं
- यह एक्सप्रेसवे जनपद में मुजफ्फरनगर की सीमा से प्रवेश करेगा और धामपुर तहसील से होता हुआ मुरादाबाद की ओर निकल जाएगा। जिले में इसकी कुल लंबाई करीब 55 किलोमीटर होगी।
- बिजनौर के इस 55 किमी हिस्से के निर्माण पर लगभग 2,729 करोड़ रुपये खर्च होने का अनुमान है।
- यह प्रोजेक्ट हरियाणा के पानीपत को शामली और गोरखपुर से जोड़ते हुए यूपी के 21-22 जिलों के बीच हाई-स्पीड कनेक्टिविटी प्रदान करेगा।
यह भी देखें: NPS Swasthya Scheme: पेंशन के साथ फ्री इलाज का फायदा, सरकार की नई योजना से खत्म होगी मेडिकल टेंशन
विकास को मिलेगी नई रफ़्तार
विशेषज्ञों का मानना है कि इस ग्रीनफील्ड एक्सप्रेसवे के बनने से पश्चिमी उत्तर प्रदेश और पूर्वांचल के बीच की दूरी काफी कम हो जाएगी, इससे न केवल सफर आसान होगा, बल्कि औद्योगिक गलियारों के विकास से स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे, वर्तमान में, अधिग्रहण की प्रक्रिया जनवरी 2026 में तेजी पकड़ चुकी है और 2026 के अंत तक निर्माण कार्य पूरी तरह शुरू होने की उम्मीद है।
















