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टोल का झंझट खत्म! अब बिना रुके सीधे पार होगी गाड़ी और अपने आप कटेगा बैलेंस; जानें कैसे काम करेगा ये नया सिस्टम।

गुजरात के सूरत में देश का पहला बिना बैरियर टोल सिस्टम शुरू। अब गाड़ियां बिना रुके पार होंगी, कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर टोल अपने आप कटेगा। AI-ANPR तकनीक से चोरी असंभव, NHAI सर्वर पर रियल-टाइम डेटा। 2026 तक पूरे देश में MLFF- जाम खत्म, समय बचेगा।

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भारतीय सड़कों पर टोल प्लाजा की लंबी कतारों का अंतिम सफर शुरू हो चुका है। गुजरात के सूरत में देश का पहला बिना बैरियर टोल सिस्टम चालू हो गया है, जहां वाहन 80 किमी/घंटा स्पीड पर बिना रुके निकलेंगे। हाई-रेजोल्यूशन कैमरे नंबर प्लेट स्कैन कर टोल लिंक्ड बैंक अकाउंट से काट लेंगे। केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने 2026 के अंत तक पूरे देश में AI-बेस्ड MLFF (मल्टी-लेन फ्री फ्लो) सिस्टम लागू करने का ऐलान किया है। यह FASTag को पीछे छोड़ते हुए ₹1,500 करोड़ ईंधन बचत और ट्रैफिक जाम मुक्ति का वादा करता है।

फास्टैग आने के बाद भी टोल बूथ्स पर जाम आम है- टैग खराब, बैलेंस कम या तकनीकी खराबी से। सूरत का पायलट प्रोजेक्ट ANPR (ऑटोमैटिक नंबर प्लेट रिकग्निशन) तकनीक पर चलता है। यहां बैरियर हटाकर रडार, लिडार और 360-डिग्री कैमरे लगाए गए हैं। हर गाड़ी गुजरते ही स्कैन होती है, डेटा NHAI सर्वर पर रियल-टाइम जाता है। फास्टैग न होने पर भी नंबर प्लेट से पहचान हो जाती है।

नया सिस्टम कैसे काम करेगा?

सूरत टोल प्लाजा पर कोई गेट या बैरियर नहीं। वाहन आता है, कैमरा नंबर प्लेट, वाहन प्रकार (कार/ट्रक) पढ़ता है। AI डेटा वैलिडेट कर टोल कैलकुलेट करता है- GPS/सैटेलाइट से दूरी मापकर। लिंक्ड वॉलेट या बैंक से डिडक्शन तुरंत। बैलेंस कम? SMS अलर्ट और डिफॉल्टर मार्क। 7 दिन में रिचार्ज न करें तो ई-चालान। टोल चोरी असंभव- हर लेन की 360° रिकॉर्डिंग। NHAI का दावा: 100% कलेक्शन, प्रदूषण में 20% कमी। दिल्ली-मुंबई, जयपुर जैसे पायलट्स सफल हैं।

देशव्यापी विस्तार

गडकरी ने दिसंबर 2025 में कहा- 2026 अंत तक नेशनल हाईवेज पर MLFF। C1X जैसे मॉडेम्स की तरह यह ऐपल का नहीं, NHAI का स्मार्ट सॉल्यूशन। सालाना ₹40,000 करोड़ टोल रेवेन्यू में ₹6,000 करोड़ बढ़ोतरी। स्टेट हाईवेज बाद में शामिल। यूजर्स के लिए RC लिंकिंग जरूरी- MyGov ऐप या NHAI पोर्टल से। गुजरात मॉडल सफल रहा तो महाराष्ट्र, यूपी में अगला।

फायदे और चुनौतियां

फायदे:

  • समय बचत: 30-50% तेज सफर, ईंधन बचेगा।
  • सुरक्षा: जाम खत्म, एक्सीडेंट कम।
  • पारदर्शिता: चोरी रुकेगी, रेवेन्यू बढ़ेगा।

चुनौतियां: ग्रामीण इलाकों में इंटरनेट, नंबर प्लेट गंदगी। लेकिन AI इसे हैंडल करेगा। विशेषज्ञों का मानना: यह GNSS (सैटेलाइट टोलिंग) की ओर कदम है।

गुजरात ने बाकी राज्यों को मिसाल दी। अब ट्रैवलर्स बिना रुके दिल्ली से मुंबई 12 घंटे में पहुंच सकेंगे। सरकार का लक्ष्य: वर्ल्ड-क्लास हाईवे। ड्राइवर्स, RC चेक करें- नया दौर आ गया! 

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info@dietjjr.in

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