
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने चेक बाउंस (NI Act Section 138) के मामलों को लेकर एक अत्यंत महत्वपूर्ण कानूनी व्यवस्था दी है, कोर्ट ने स्पष्ट किया है कि चेक बाउंस होने की स्थिति में कोई भी ‘तीसरा पक्ष’ (Third Party) या अनजान व्यक्ति कानूनी शिकायत दर्ज नहीं करा सकता है।
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इलाहाबाद हाईकोर्ट का ऐतिहासिक फैसला
इलाहाबाद हाईकोर्ट ने 29 जनवरी 2026 को दिए अपने फैसले में कहा कि नेगोशिएबल इंस्ट्रूमेंट एक्ट (NI Act) की धारा 138 के तहत शिकायत केवल वही व्यक्ति या संस्था कर सकती है, जिसके नाम पर चेक जारी किया गया है (Payee) या जो कानूनी रूप से उस चेक का धारक (Holder in due course) है।
कोर्ट ने यह साफ कर दिया कि भले ही कोई व्यक्ति उस व्यावसायिक लेन-देन से प्रभावित हो रहा हो, लेकिन अगर चेक उसके नाम पर नहीं है, तो वह अदालत में केस दाखिल करने का हकदार नहीं है।
क्या था पूरा मामला?
- शिकायतकर्ता: मेसर्स कृष्णा होटल्स एंड डेवलपर्स (एक पार्टनरशिप फर्म)।
- विवाद: फर्म ने राजेश कुकरेजा (आरोपी) के खिलाफ 22 लाख रुपये के 11 चेक बाउंस होने पर केस दर्ज कराया था।
- पेंच: ये सभी 11 चेक ‘होटल पैराडाइज’ (Hotel Paradise) के नाम पर जारी किए गए थे, न कि ‘कृष्णा होटल्स’ के नाम पर।
- दलील: शिकायतकर्ता फर्म ने दलील दी कि होटल पैराडाइज के साथ उनका व्यावसायिक संबंध है और मौखिक समझौते के तहत वे इस भुगतान के हकदार हैं।
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कोर्ट की महत्वपूर्ण टिप्पणियां
जस्टिस समित गोपाल की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए निचली अदालत द्वारा जारी समन आदेश को रद्द कर दिया, कोर्ट के मुख्य बिंदु इस प्रकार रहे:
- केवल ‘पेयी’ या ‘होल्डर इन ड्यू कोर्स’ ही शिकायतकर्ता हो सकता है, कोई ‘स्ट्रेंजर’ (अजनबी) इस प्रक्रिया को शुरु नहीं कर सकता।
- पेयी का अधिकृत प्रतिनिधि या पावर ऑफ अटॉर्नी होल्डर शिकायत दर्ज करा सकता है, लेकिन शिकायत मूल रूप से पेयी के नाम पर ही होनी चाहिए।
- कोर्ट ने स्पष्ट किया कि एनआई एक्ट की धारा 142 शिकायत दर्ज करने के लिए सख्त कानूनी मापदंड निर्धारित करती है, जिसका उल्लंघन नहीं किया जा सकता。
इस फैसले के बाद अब यह स्पष्ट हो गया है कि चेक बाउंस के मामलों में कानूनी कार्रवाई का अधिकार बेहद सीमित है, यदि चेक आपके नाम पर नहीं है, तो आप उस लेन-देन का हिस्सा होने के बावजूद सीधे तौर पर कानूनी शिकायत दर्ज नहीं कर सकते।
















