
बिहार में मुख्यमंत्री विद्युत उपभोक्ता सहायता योजना के तहत 125 यूनिट फ्री बिजली की घोषणा ने जहां करोड़ों उपभोक्ताओं को राहत दी है, वहीं एक बड़े वर्ग के मन में अब भी सवाल है, कई उपभोक्ता इस बात से हैरान हैं कि 125 यूनिट तक की छूट मिलने के बावजूद उनके बिजली बिल में जीरो के बजाय बड़ी राशि क्यों दिख रही है।
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‘प्रो-राटा’ (आनुपातिक) गणना का गणित
बिजली कंपनी के अनुसार, 125 यूनिट की फ्री सीमा 30 दिनों के एक मानक महीने के लिए तय है, खेल यहीं से शुरू होता है अगर आपका बिलिंग साइकिल 30 दिन से कम या ज्यादा होता है, तो फ्री यूनिट की संख्या भी बदल जाती है।
- उदाहरण: यदि आपका बिल 40 दिनों के बाद बना, तो आपको करीब 167 यूनिट फ्री मिलेंगी। लेकिन अगर बिल 20 दिन का ही है, तो केवल 83 यूनिट ही फ्री होंगी। इसके ऊपर की एक भी यूनिट पर आपको पैसे देने होंगे।
स्वीकृत भार (Load) से ज्यादा का इस्तेमाल
अगर आपने 1 किलोवाट का कनेक्शन लिया है और आप उससे अधिक लोड का उपयोग कर रहे हैं, तो कंपनी आप पर आधिक्य भार शुल्क (Excess Load Charge) लगाती है, यह जुर्माना फ्री बिजली की योजना के दायरे से बाहर है, जिससे बिल की राशि बढ़ जाती है।
फिक्स्ड चार्ज और बिजली शुल्क (Duty)
योजना के तहत फिक्स्ड चार्ज की माफी तभी मिलती है जब आपकी खपत 125 यूनिट के भीतर हो, जैसे ही आपकी खपत 125 यूनिट (30 दिन के आधार पर) की सीमा को पार करती है, आपको पूरे बिल पर फिक्स्ड चार्ज और सरकारी बिजली शुल्क देना पड़ता है।
पुराने बकाये का बोझ
BSPHCL ने स्पष्ट किया है कि कई उपभोक्ताओं के बिल में पिछले महीनों का बकाया और उस पर लगा विलंब शुल्क (Surcharge) जुड़ा होता है सरकार केवल वर्तमान खपत की शुरुआती 125 यूनिट पर सब्सिडी दे रही है, पुराने बकाये पर नहीं, पुराने बकाये के समाधान के लिए उपभोक्ता BSPHCL की समाधान योजना का लाभ उठा सकते हैं।
स्मार्ट मीटर वालों के लिए अलग नियम
स्मार्ट प्रीपेड मीटर ग्राहकों को शुरुआत में रिचार्ज करना ही पड़ता है, महीने के अंत में जब डेटा प्रोसेस होता है, तब फ्री यूनिट की राशि उनके बैलेंस में वापस क्रेडिट कर दी जाती है, कई लोग इस रिफंड प्रक्रिया को समझ नहीं पाने के कारण इसे ‘ज्यादा बिल’ मान लेते हैं।
















