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Mystery River: 9 देशों का सफर और 6400 किमी की लंबाई! जानिए दुनिया की उस इकलौती नदी के बारे में जहां आज तक नहीं बन पाया कोई पुल।

अमेज़न नदी: दुनिया की इकलौती नदी जो 9 देशों (ब्राजील, पेरू समेत) से होकर 6400 किमी बहती है! पेरू के एंडीज़ से अटलांटिक तक, घने जंगल, 3000 मछलियाँ- लेकिन नरम मिट्टी व बाढ़ से आज तक कोई पुल नहीं। प्रकृति का रहस्यमय चमत्कार!

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दुनिया में करीब 1,50,000 नदियां बहती हैं, जिनमें नील, अमेजन, यांग्त्जी जैसी प्रमुख 165 नदियां शामिल हैं। लेकिन एक ऐसी रहस्यमयी नदी है जो 9 देशों का सफर तय करती है, लगभग 6400 किलोमीटर लंबी है, फिर भी आज तक इसके ऊपर कोई स्थायी पुल नहीं बन सका। हम बात कर रहे हैं दक्षिण अमेरिका की अमेजन नदी (Amazon River) की, जो पृथ्वी का सबसे बड़ा जैव विविधता केंद्र है। इसकी चौड़ाई कभी-कभी 11 किलोमीटर तक फैल जाती है, और यह मीठे पानी का 20% हिस्सा समेटे हुए है।

9 देशों का अद्भुत सफर

अमेजन नदी पेरू के एंडीज पर्वत श्रृंखला से निकलती है और ब्राजील के घने वर्षावनों को पार कर अटलांटिक महासागर में जाकर मिलती है। रास्ते में यह 9 देशों – पेरू, ब्राजील, बोलिविया, कोलंबिया, इक्वाडोर, वेनेजुएला, गुयाना, सूरीनाम और फ्रेंच गुयाना- को स्पर्श करती है। ब्राजील में इसका 60% हिस्सा बहता है, जहां इक्वाडोर लाइन पार्क जैसे पर्यटन स्थल बने हैं। दुनिया की दूसरी सबसे लंबी नदी (नील के बाद) होने के बावजूद, इसका बेसिन 70 लाख वर्ग किलोमीटर में फैला है, जो यूरोप से भी बड़ा है। यह नदी सालाना 20% वैश्विक वर्षा को प्रभावित करती है।

पुल क्यों नहीं बन पाया?

अमेजन पर कोई पुल न बनने का रहस्य इसकी भौगोलिक चुनौतियों में छिपा है। नदी की औसत चौड़ाई 10-50 किलोमीटर है, जो बरसात में और बढ़ जाती है। नरम मिट्टी, तेज बहाव (प्रति सेकंड 2 लाख 90 हजार क्यूबिक मीटर पानी), भूकंपीय गतिविधियां और घने जंगल निर्माण को असंभव बनाते हैं। छोटे फेरी और नावें ही पारावरण का सहारा हैं। ब्राजील सरकार ने 1970-80 के दशक में पुल प्रयास किए, लेकिन बाढ़ और पारिस्थितिकी क्षति से विफल रहे। पर्यावरणविद मानते हैं कि पुल बनाने से वर्षावन का संतुलन बिगड़ सकता है।

जैव विविधता का खजाना

अमेजन के किनारे दुनिया के सबसे घने जंगल हैं, जिन्हें ‘पृथ्वी का फेफड़ा’ कहा जाता है। यहां 30 करोड़ से ज्यादा पेड़, 2500 मछली प्रजातियां, पिंक डॉल्फिन, एनाकोंडा, पिरान्हा, इलेक्ट्रिक ईल और 1300 पक्षी प्रजातियां पाई जाती हैं। सहायक नदियां जैसे मदेरा, नेग्रो, टापाजोस और शिंगू इसमें मिलती हैं। समुद्र में मिलने पर 100 किलोमीटर दूर तक पानी मीठा रहता है। जलवायु परिवर्तन से इसका जलस्तर घट रहा है, जो वैश्विक चिंता का विषय है।

मानव प्रभाव और भविष्य

अमेजन आदिवासी समुदायों का घर है, जो सदियों से यहां रहते हैं। अवैध लकड़ी कटाई और खनन से खतरा बढ़ा है। UNESCO ने इसे विश्व धरोहर घोषित किया है। भारत जैसे देशों में इसे पर्यावरण शिक्षा का प्रतीक बनाया जा रहा है। वैज्ञानिक सुझाते हैं कि सस्टेनेबल टूरिज्म से इसे बचाया जा सकता है। कुल मिलाकर, यह नदी प्रकृति की अनुपम रचना है।

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