
दिल्ली सरकार ने राजधानी में गरीबों के लिए राशन कार्ड (Ration Card) पात्रता के नए मानदंड तय कर दिए हैं। खाद्य एवं आपूर्ति विभाग (Food & Supply Department) ने ऐसे राशन कार्डधारियों को नोटिस (Notice) जारी करना शुरू कर दिया है, जिनके पास दिल्ली में घर और जमीन होने के साथ-साथ अपनी गाड़ी (Vehicle) भी है। विभाग ने कहा है कि ऐसे लोग अपने राशन कार्ड के लिए अब पात्र नहीं माने जाएंगे।
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SMS के जरिए नोटिस जारी, जवाब अनिवार्य
दिल्ली सरकार के जांच अभियान (Investigation Drive) के तहत, आठ लाख से अधिक राशन कार्डधारियों को अपात्र पाया गया है। अब इन्हें SMS के जरिए नोटिस भेजा जा रहा है। नोटिस में कहा गया है कि अगर लाभार्थी विभाग को जवाब नहीं देते हैं या अपनी संपत्ति व आय की जानकारी नहीं देते हैं, तो उनका राशन कार्ड रद्द (Cancel) कर दिया जाएगा। सरकार ने यह भी स्पष्ट किया है कि राशन कार्ड के लिए न्यूनतम सालाना आय (Minimum Annual Income) एक लाख रुपये होना अनिवार्य है। इसके लिए राजस्व विभाग (Revenue Department) से जारी आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) जमा करना जरूरी है।
राशन कार्ड डीलर्स का विरोध
दिल्ली सरकारी राशन डीलर्स संघ (Delhi Government Ration Dealers Association) ने इस नोटिस पर सवाल उठाया है। संघ का कहना है कि जांच अभियान ठीक है, लेकिन नोटिस ऐसे लोगों को दिए जा रहे हैं जिनका दिल्ली में कोई जमीन नहीं है। बहुत से लोग दूसरे राज्यों से दिल्ली आए हुए हैं, और उनकी जमीन बाहर के गांवों में है। इसे आधार बनाकर भी उन्हें अपात्र बताया जा रहा है।
संघ का दावा है कि सिर्फ आय प्रमाण पत्र (Income Certificate) को ही पात्रता मान लेना पर्याप्त नहीं है। क्योंकि इसमें मिलीभगत (Collusion) कर गैरजरूरतमंद लोग भी राशन कार्ड बना सकते हैं।
दिल्ली में गरीबी की नई परिभाषा
दिल्ली सरकार का कहना है कि अब घर, जमीन और वाहन वाले व्यक्ति गरीब नहीं माने जाएंगे। इसका उद्देश्य है कि राशन जैसी सब्सिडी (Subsidy) केवल उन लोगों तक पहुंचे जिन्हें वास्तव में जरूरत है।
सरकार ने नोटिस में स्पष्ट किया है कि:
- घर और जमीन के साथ गाड़ी रखने वाले राशन कार्डधारी अपात्र हैं।
- आय प्रमाण पत्र जमा करना अनिवार्य है।
- अगर जवाब नहीं दिया गया या जानकारी गलत पाई गई, तो राशन कार्ड अगले महीने से रद्द कर दिया जाएगा।
इस अभियान का असर बड़ी संख्या में लोगों पर पड़ा है। बीते दिनों जांच अभियान के दौरान 8 लाख से अधिक लोग अपात्र पाए गए।
विशेषज्ञों की राय
खाद्य और आपूर्ति विभाग के अधिकारी कहते हैं कि यह कदम Targeted Welfare Scheme के लिए जरूरी है। वहीं डीलर्स संघ का मानना है कि इसे और अधिक सटीक तरीके से लागू किया जाना चाहिए, ताकि केवल दिल्ली में संपत्ति रखने वालों को ही इस नियम के तहत माना जाए। विशेषज्ञों का कहना है कि यह कदम गरीबी के पैमाने को परिभाषित करने और सार्वजनिक संसाधनों का दुरुपयोग रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
















