
अगर आप भी अपनी कार में भारी-भरकम म्यूजिक सिस्टम और कान फाड़ देने वाले ‘बेस’ (Bass) के शौकीन हैं, तो सावधान हो जाइए, सड़कों पर दूसरों को परेशान करने वाला आपका यह शौक अब आपको सीधे सलाखों के पीछे पहुंचा सकता है, ट्रैफिक पुलिस ने ध्वनि प्रदूषण के खिलाफ एक बड़ा अभियान छेड़ते हुए गाड़ियों की सघन चेकिंग शुरू कर दी है।
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₹10,000 का जुर्माना और जेल की सजा
ट्रैफिक नियमों के मुताबिक, गाड़ियों में तय मानकों से अधिक शोर मचाना अब महंगा पड़ेगा, Motor Vehicles Act की धारा 190(2) के तहत वायु और ध्वनि प्रदूषण फैलाने पर ₹10,000 के जुर्माने का प्रावधान है, इतना ही नहीं, दोषी पाए जाने पर वाहन चालक को 3 महीने तक की जेल भी काटनी पड़ सकती है। दोबारा पकड़े जाने पर यह सजा और जुर्माना दोनों बढ़ सकते हैं।
अवैध मॉडिफिकेशन पर पुलिस की पैनी नजर
पुलिस उन गाड़ियों को विशेष रुप से निशाना बना रही है जिनमें बाहर से भारी एम्पलीफायर और बड़े वूफर लगवाए गए हैं, कानूनन, कंपनी फिटेड म्यूजिक सिस्टम के अलावा किया गया कोई भी बदलाव ‘अवैध मॉडिफिकेशन’ की श्रेणी में आता है, Noise Pollution Rules, 2000 के अनुसार, रात 10 बजे से सुबह 6 बजे के बीच सार्वजनिक स्थानों पर तेज म्यूजिक बजाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
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देशभर में सख्ती, जब्त हो रहीं गाड़ियां
दिल्ली-NCR से लेकर मुंबई और यूपी के कई शहरों में पुलिस ने लाउड म्यूजिक, प्रेशर हॉर्न और मॉडिफाइड साइलेंसर के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है, कई मामलों में पुलिस न केवल चालान काट रही है, बल्कि Bharatiya Nyaya Sanhita (BNS) के तहत ‘पब्लिक न्यूसेंस’ पैदा करने के आरोप में गाड़ियां जब्त भी की जा रही हैं।
सफर के दौरान संगीत का आनंद जरुर लें, लेकिन आवाज उतनी ही रखें जो दूसरों के लिए सिरदर्द न बने, नियम तोड़ना अब न केवल आपकी जेब खाली करेगा बल्कि आपको हवालात की हवा भी खिला सकता है।
















