
पीएम किसान सम्मान निधि की 22वीं किस्त का इंतजार जोरों पर है, लेकिन बिहार के लाखों किसान भाईयों को झटका लगने वाला है। नाम के छोटे-मोटे फर्क ने फार्मर ID अटका दी है। जमाबंदी और आधार में नाम मैच न होने से 50 लाख से ज्यादा किसान अभी भी बाहर। केंद्र साफ कह चुका – बिना फार्मर रजिस्ट्री के कोई योजना का लाभ नहीं। आइए, इस मुश्किल को सरल शब्दों में समझें और समाधान बताएं। अभी समय है, जुट जाओ!
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बिहार में फार्मर ID की क्यों हो रही देरी?
देखिए भाई, बिहार में 85 लाख किसानों को फार्मर ID बनानी है, जिनमें 73 लाख पीएम किसान के लाभार्थी हैं। लेकिन अभी सिर्फ 29 लाख की ID बनी है – यानी 40-50 लाख अटके पड़े हैं। वजह? जमाबंदी रिकॉर्ड और आधार कार्ड में नाम की स्पेलिंग अलग। थोड़ा सा ‘अ’ या ‘आ’ का फर्क, और ऑनलाइन पोर्टल रिजेक्ट कर देता है। सरकार ने कैंप लगवाए, लेकिन ये छोटी सी दिक्कत ने सब बिगाड़ दिया। अगर आप भी इसी जाल में फंसे हैं, तो चिंता मत करो सुधार का रास्ता है।
नाम मेल न खाने की ये पुरानी बीमारी
कई किसान भाई बताते हैं कि जमीन के कागजों में दादाजी का नाम पुराना स्टाइल में लिखा है, आधार में नया। या उत्तराधिकार में नाम ट्रांसफर नहीं हुआ। नतीजा? कृषि विभाग के चक्कर, लेकिन काम नहीं बनता। अधिकारी कहते हैं, सॉफ्टवेयर स्ट्रिक्ट है – एक अक्षर का फर्क भी बर्दाश्त नहीं। ये समस्या सिर्फ बिहार तक सीमित नहीं, लेकिन यहां जमाबंदी के पुराने रिकॉर्ड्स ने इसे बड़ा बना दिया। अच्छी बात ये कि अब ऑनलाइन सुधार आसान हो गया है। देर मत करो, 22वीं किस्त फिसल न जाए!
जमाबंदी सुधार कैसे कराएं?
सबसे पहले, नजदीकी अंचल कार्यालय या भूमि सुधार ऑफिस जाओ। असली दस्तावेज – आधार, जमाबंदी कॉपी, उत्तराधिकार पत्र – ले जाना। लेकिन घर बैठे करना हो तो biharbhumiplus.bihar.gov.in पर रजिस्टर करो।
स्टेप 1: नागरिक लॉगिन > पंजीकरण। नाम, मोबाइल, पता भरकर रजिस्टर। OTP से वेरिफाई।
स्टेप 2: लॉगिन करो, परिमार्जन प्लस टैब खोलो। parimarjanplus.bihar.gov.in पर जाओ। ‘डिजिटल जमाबंदी सुधार’ या ‘छूटी जमाबंदी डिजिटाइजेशन’ चुनो।
स्टेप 3: बदलाव चुनो – नाम, जाति, पता, भूमि डिटेल्स। दस्तावेज अपलोड करो, प्रीव्यू देखो, एडिट अगर जरूरी, फिर फाइनल सबमिट। हो गया!
ये प्रोसेस 7-15 दिन में कंपलीट हो जाता है। ऑनलाइन ट्रैकिंग भी है।
जमाबंदी में कौन-कौन से बदलाव संभव?
पोर्टल पर रैयत का नाम, जाति प्रमाणपत्र, पता, भूमि विवरण – सब सुधार सकते हो। बंटवारा या उत्तराधिकार नामांतरण भी ऑनलाइन। अगर पुरानी छूटी जमीन है, तो डिजिटाइज करो। दस्तावेज साफ रखो – फोटो कॉपी, अफिडेविट। एक बार सुधार हो गया, तो फार्मर ID बन जाएगी, और पीएम किसान की किस्त सीधे खाते में। आसान है ना?
22वीं किस्त कब आएगी? अलर्ट!
अभी आधिकारिक डेट नहीं, लेकिन फरवरी के आखिर तक उम्मीद। पिछली बार भी वैसा ही हुआ था। बिहार के किसान जागो – ID बनवा लो, वरना 2000 रुपये हाथ से निकल जाएगा। DBT से ट्रांसफर होता है, लेकिन रजिस्ट्री जरूरी। हेल्पलाइन 011-24300606 पर कॉल करो या pmkisan.gov.in चेक करो।
















