
वैश्विक अर्थव्यवस्था के मंच पर भारत एक महाशक्ति के रूप में उभर रहा है, हाल ही में आई एक ग्लोबल रिपोर्ट ने इस बात की पुष्टि कर दी है कि टैक्स कलेक्शन के मामले में भारत ने न केवल नए कीर्तिमान स्थापित किए हैं, बल्कि दुनिया के कई दिग्गज और अमीर देशों को भी पीछे छोड़ दिया है, 2026 की शुरुआत के साथ ही भारत की यह उपलब्धि वैश्विक सुर्खियां बटोर रही है।
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टैक्स संग्रह में ऐतिहासिक उछाल
रिपोर्ट के मुताबिक, भारत का प्रत्यक्ष कर (Direct Tax) और जीएसटी (GST) संग्रह निरंतर वृद्धि के पथ पर है, वित्त वर्ष 2025-26 के आंकड़ों ने विशेषज्ञों को भी चौंका दिया है, जहाँ टैक्स रेवेन्यू में भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है, यह वृद्धि दर्शाती है कि भारतीय अर्थव्यवस्था की नींव न केवल मजबूत है, बल्कि यह बेहद तेज गति से विस्तार कर रही है।
डिजिटल क्रांति ने बदली तस्वीर
भारत की इस सफलता के पीछे सबसे बड़ा हाथ ‘डिजिटल इंडिया’ अभियान का माना जा रहा है, आयकर विभाग (Income Tax Department) के पारदर्शी पोर्टल और GST नेटवर्क के सुदृढ़ीकरण की वजह से कर चोरी पर लगाम लगी है, कर भरने की प्रक्रिया के सरलीकरण ने आम नागरिकों और व्यापारियों को टैक्स सिस्टम से जुड़ने के लिए प्रेरित किया है।
विकसित देशों को दी मात
वैश्विक स्तर पर तुलना की जाए, तो भारत का ‘टैक्स-टू-जीडीपी’ अनुपात कई विकसित अर्थव्यवस्थाओं (G7 देशों) के मुकाबले बेहतर सुधार दिखा रहा है, जहाँ दुनिया के बड़े देश आर्थिक सुस्ती से जूझ रहे हैं, वहीं भारत ने अपने कर अनुपालन (Compliance) और राजस्व प्रबंधन से यह साबित कर दिया है कि वह भविष्य की ग्लोबल इकोनॉमिक लीडरशिप के लिए तैयार है।
करदाताओं की संख्या में भारी वृद्धि
इस रिपोर्ट का एक और महत्वपूर्ण पहलू यह है कि भारत में मध्यम वर्ग की सक्रिय भागीदारी बढ़ी है, नए करदाताओं की बढ़ती संख्या ने सरकार के खजाने को मजबूती दी है, जिससे बुनियादी ढांचे (Infrastructure) और विकास कार्यों को गति मिल रही है, आर्थिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि यही रफ्तार जारी रही, तो भारत जल्द ही दुनिया की शीर्ष तीन अर्थव्यवस्थाओं में अपनी जगह पक्की कर लेगा, सरकारी नीतियों और विकास की अधिक जानकारी के लिए आप प्रेस सूचना ब्यूरो (PIB) पर विजिट कर सकते हैं।
















