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Yes Bank के शेयरों में खेल! SEBI ने पकड़ी बड़ी गड़बड़ी, 19 लोगों की बढ़ी मुश्किलें

जुलाई 2022 की बड़ी डील से पहले गोपनीय टिप्स लीक, 19 लोग निशाने पर। कार्लाइल-एडवेंट की 10% हिस्सेदारी खरीद पर शेयर उछले, लेकिन अंदरूनी ट्रेडिंग ने मचा दिया बवाल। कारण बताओ नोटिस जारी, जुर्माना-बैन का खतरा। कंसल्टेंसी फर्मों की कंप्लायंस पर सवाल!

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Yes Bank के शेयरों में खेल! SEBI ने पकड़ी बड़ी गड़बड़ी, 19 लोगों की बढ़ी मुश्किलें

बाजार के रेगुलेटर SEBI ने एक बार फिर कॉर्पोरेट जगत को हिलाकर रख दिया है। यस बैंक के शेयरों में इनसाइडर ट्रेडिंग का ऐसा बड़ा स्कैंडल पकड़ा गया है, जिसमें PwC और EY जैसी दिग्गज कंसल्टेंसी फर्मों के मौजूदा और पूर्व एग्जीक्यूटिव्स समेत 19 लोग निशाने पर हैं। जुलाई 2022 में यस बैंक की बड़ी हिस्सेदारी बिक्री के दौरान ये गड़बड़ी हुई, जब गोपनीय डील की खबर लीक हो गई। SEBI ने नवंबर 2025 में इन्हें कारण बताओ नोटिस थमा दिया है। ये नोटिस जांच का पहला बड़ा कदम है, और अगर आरोप साबित हुए तो जुर्माना, ट्रेडिंग बैन जैसी सजा मिल सकती है। आइए, इस पूरे मामले को समझते हैं स्टेप बाय स्टेप।

2022 में क्या हुआ था यस बैंक के साथ?

याद कीजिए, 2022 का वो जुलाई का महीना। यस बैंक मुश्किलों से उबर रहा था और उसे बड़ी फंडिंग की सख्त जरूरत थी। 29 जुलाई को घोषणा हुई कि कार्लाइल ग्रुप और एडवेंट इंटरनेशनल ने मिलकर बैंक की करीब 10 फीसदी हिस्सेदारी 1.1 अरब डॉलर में खरीद ली। अगले दिन शेयरों में 6 फीसदी की जोरदार उछाल आ गया। लेकिन SEBI को शक हुआ कि डील की घोषणा से ठीक पहले शेयरों में जो हलचल हुई, वो नॉर्मल नहीं थी।

जांच में पता चला कि कुछ लोग पहले से ही इनसाइडर टिप्स लेकर ट्रेडिंग कर रहे थे। ये लोग कार्लाइल, एडवेंट, PwC और EY से जुड़े थे, जिन्हें अनपब्लिश्ड प्राइस सेंसिटिव इंफॉर्मेशन (UPSI) मिली हुई थी। एक पूर्व बोर्ड मेंबर पर भी गोपनीय डिटेल शेयर करने का इल्जाम लगा है। सोचिए, कितना बड़ा खेल था!

किन-किन पर लगे हैं गंभीर आरोप?

SEBI ने 19 ‘कनेक्टेड पर्सन्स’ को नोटिस दिया है। इनमें PwC और EY इंडिया के दो एग्जीक्यूटिव्स शामिल हैं, जो डील से डायरेक्ट जुड़े थे। कार्लाइल और एडवेंट के कुछ भारतीय अधिकारी भी लपेटे में हैं। सबसे चौंकाने वाली बात तो ये कि इनके फैमिली मेंबर्स और क्लोज फ्रेंड्स – कुल 5 लोग – ने इस UPSI का फायदा उठाकर शेयर खरीदे-बेचे और गैरकानूनी मुनाफा कमाया। यस बैंक के बोर्ड के एक पूर्व सदस्य ने भी जानकारी लीक की, जिससे ट्रेडिंग का चक्र चल पड़ा। ये सब ‘अनसाइडर’ थे, जो गोपनीय डिटेल्स को चुनिंदा लोगों तक पहुंचा रहे थे। बाजार में ये ट्रेडिंग सामान्य लग रही थी, लेकिन असल में ये सब प्लान्ड था।

कंसल्टेंसी फर्मों की चूक ने खोली पोल

PwC और EY जैसी ग्लोबल फर्में, जो ट्रस्ट का प्रतीक मानी जाती हैं, इस केस में फंस गईं। एडवेंट ने टैक्स एडवाइजरी के लिए EY को हायर किया था, साथ ही यस बैंक के मैनेजमेंट पर फीडबैक लिया। EY मर्चेंट बैंकिंग को वैल्यूएशन का काम मिला। वहीं, कार्लाइल-एडवेंट ने PwC से टैक्स प्लानिंग और ड्यू डिलिजेंस करवाया। SEBI का कहना है कि इन फर्मों की कंप्लायंस सिस्टम में बड़ी खामियां थीं।

EY ने यस बैंक को ‘रिस्ट्रिक्टेड लिस्ट’ में ठीक से नहीं डाला, जिससे डायरेक्ट स्टाफ पर तो ट्रेडिंग बैन था, लेकिन अप्रत्यक्ष जानकारी वाले एम्प्लॉयी फ्री थे। PwC के पास तो क्लाइंट्स के लिए कोई साफ रिस्ट्रिक्टेड स्टॉक लिस्ट ही नहीं थी! SEBI ने EY इंडिया के चेयरमैन राजीव मेमानी और चीफ ऑपरेटिंग ऑफिसर को भी नोटिस दिया है। उनका कहना है कि EY की इनसाइडर ट्रेडिंग पॉलिसी कमजोर थी – ऑडिट के अलावा एडवाइजरी या वैल्यूएशन सर्विसेज में ट्रेडिंग पर सख्ती नहीं। ये केस दिखाता है कि बड़े नाम भी लापरवाही कर सकते हैं।

SEBI का एक्शन और बाजार पर असर

नोटिस के बाद सबकी नजरें SEBI के अगले स्टेप पर हैं। अगर आरोप पक्के हुए, तो व्यक्तियों पर भारी जुर्माना, ट्रेडिंग पर सालों का बैन लग सकता है। फर्मों को भी सिस्टम सुधारने पड़ेंगे। ये दुर्लभ केस है, जहां प्राइवेट इक्विटी और कंसल्टेंसी के सीनियर फंडिंग डील से जुड़े इनसाइडर ट्रेडिंग में फंसे। बाजार के लिए ये वॉर्निंग है – गोपनीयता का उल्लंघन माफ नहीं होगा। निवेशक अब और सतर्क हो जाएंगे। कुल मिलाकर, ये मामला कॉर्पोरेट गवर्नेंस पर बड़ा सवाल खड़ा करता है। क्या ये फर्में अपनी पॉलिसी टाइट करेंगी? आने वाले दिनों में और डिटेल्स सामने आएंगी।

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info@dietjjr.in

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