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यूपी का नया ‘चौराहा’ बनेगा बरेली! 4 एक्सप्रेसवे जंक्शन का नया नक्शा जारी, शामली से गोरखपुर जाना होगा आसान

योगी सरकार का धमाका! बरेली-ललितपुर कारिडोर से उत्तर से दक्षिण तक हाईवे कनेक्ट। कासगंज-आगरा-झांसी रूट पर बनेगा, गंगा-यमुना एक्सप्रेसवे से जुड़ेगा। उत्तराखंड से मध्य प्रदेश तक रफ्तार तेज। कैबिनेट अप्रूवल का इंतजार। यात्रा आसान, व्यापार बूम!

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यूपी का नया 'चौराहा' बनेगा बरेली! 4 एक्सप्रेसवे जंक्शन का नया नक्शा जारी, शामली से गोरखपुर जाना होगा आसान

उत्तर प्रदेश में सड़कें इतनी चौड़ी और तेज हो जाएं कि दिल्ली से लखनऊ, गोरखपुर से शामली और अब बरेली से ललितपुर तक बस घंटों में पहुंच जाएं। योगी आदित्यनाथ की सरकार इसी सपने को हकीकत बना रही है। बरेली-ललितपुर कारिडोर का प्लान सामने आया है, जो उत्तर से दक्षिण तक सीधा कनेक्शन देगा। ये प्रोजेक्ट न सिर्फ यात्रा आसान करेगा, बल्कि व्यापार, रोजगार और विकास की रफ्तार भी तेज कर देगा। आइए, इसकी पूरी डिटेल समझते हैं।

हाईवे का जाल बुन रही योगी सरकार

उत्तर प्रदेश की सड़कें पहले कभी इतनी मजबूत नहीं हुईं। योगी जी ने हाईवे और एक्सप्रेसवे का जाल बिछा दिया है। बरेली से उत्तराखंड के सितारगंज तक हाईवे पहले से बन रहा है। लखनऊ-दिल्ली नेशनल हाईवे बरेली को पहले ही जोड़ चुका है। अब बरेली-मथुरा वाला नेशनल हाईवे को सिक्स लेन में बदला जा रहा है। गोरखपुर-शामली एक्सप्रेसवे की शुरुआत हो चुकी है। इन सबके बीच बरेली-ललितपुर कारिडोर नया तड़का लगाने वाला है। इससे पूरब-पश्चिम और उत्तर-दक्षिण सब दिशाओं में ट्रैफिक फर्राटेदार दौड़ेगा।

बरेली-ललितपुर कारिडोर

ये कारिडोर बरेली से शुरू होकर कासगंज, आगरा, ग्वालियर, झांसी होते हुए ललितपुर पहुंचेगा। कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश को उत्तराखंड से मध्य प्रदेश तक जोड़ देगा। खास बात ये कि बरेली इससे गंगा एक्सप्रेसवे और यमुना एक्सप्रेसवे दोनों से जुड़ जाएगा। बदायूं में गंगा एक्सप्रेसवे से लिंक होगा, जो मेरठ से प्रयागराज तक तैयार हो चुका है। मथुरा में यमुना एक्सप्रेसवे का कनेक्शन मिलेगा। सोचिए, दिल्ली से प्रयागराज या लखनऊ से आगरा जाने वाले कितना समय बचाएंगे। यात्रियों को जाम से निजात मिलेगी और ट्रक ड्राइवरों को लंबी रातें नहीं काटनी पड़ेंगी।

लोकल लेवल पर सस्पेंस क्यों?

बरेली मंडल में ये कारिडोर कैसा दिखेगा, ये अभी किसी को नहीं पता। लोक निर्माण विभाग (PWD) और NHAI के लोकल अफसरों के कान पर जूं तक नहीं रेंग रही। PWD के एक्सन नरेश शर्मा कहते हैं, “हमें मुख्यालय से कोई फाइल या डिटेल नहीं मिली। सब अखबारों से ही पता चला।” NHAI प्रोजेक्ट इंचार्ज ने भी कहा, “गोरखपुर-शामली पर काम चल रहा है, लेकिन इस कारिडोर का कोई अपडेट नहीं।” लगता है, ये प्लान टॉप लेवल से गूगल मैप्स की मदद से तैयार हुआ है। लोकल टीम को अभी इंतजार ही करना पड़ेगा।

कैबिनेट में मंजूरी का इंतजार

मुख्यमंत्री योगी ने इस नॉर्थ-साउथ कारिडोर को हरी झंडी दे दी है। अब कैबिनेट मीटिंग में पास कराने की तैयारी जोरों पर है। एक बार अप्रूवल मिला, तो टेंडर, सर्वे और कंस्ट्रक्शन की रफ्तार तेज हो जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि ये प्रोजेक्ट 2-3 साल में जमीन पर आ जाएगा। बजट का इंतजाम केंद्र और राज्य मिलकर करेंगे। योगी सरकार के पिछले रिकॉर्ड को देखें – गंगा एक्सप्रेसवे तो तय समय से पहले बन गया। उम्मीद है, ये भी वैसे ही चमकेगा।

यात्रियों और अर्थव्यवस्था को क्या फायदा?

सपने में भी न सोचें कि ये सिर्फ सड़कें हैं। ये तो उत्तर प्रदेश की किस्मत बदलने वाले हैं। बरेली जैसे शहर व्यापार का हब बनेंगे। किसान अपनी फसल आगरा-झांसी के बाजारों तक जल्दी पहुंचा सकेंगे। टूरिस्ट उत्तराखंड से झांसी घूमने आसानी से जाएंगे। रोजगार के लाखों मौके खुलेंगे – कंस्ट्रक्शन से लेकर लॉजिस्टिक्स तक। ईंधन बचेंगे, प्रदूषण कम होगा। कुल मिलाकर, पूरे क्षेत्र का GDP बूस्ट हो जाएगा। उत्तर प्रदेश अब भारत का सबसे कनेक्टेड राज्य बनेगा।

भविष्य की सड़कें

दोस्तों, योगी सरकार की ये पहल गजब की है। बरेली-ललितपुर कारिडोर से उत्तर प्रदेश सुपरफास्ट मोड में आ जाएगा। अभी लोकल अफसर चुप हैं, लेकिन जल्द ही डिटेल्स सामने आएंगी। आप भी तैयार रहिए – आने वाले दिनों में ड्राइविंग का मजा दोगुना हो जाएगा। क्या पता, अगले चुनाव तक ये हाईवे वोटों का बड़ा फैक्टर बन जाएं!

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