क्या आप जानते हैं कि कानून अब पत्नी को पति की कमाई का एक चौथाई हिस्सा गुजारा भत्ता के तौर पर दिला सकता है? इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ताजा फैसले में यही साफ कर दिया है। एक मजदूर पति की गुजारा भत्ता न बढ़ाने की गुहार को कोर्ट ने ठुकरा दिया और कहा कि पत्नी का हक पति की आय का 25 प्रतिशत तक है। यह फैसला उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर मामले से जुड़ा है, जहां परिवार न्यायालय ने पत्नी को मिलने वाली राशि को महज 500 रुपये से सीधे 3,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया था।
न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह ने इस मामले की सुनवाई करते हुए पति की पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। पति ने रोते हुए कहा कि वह गरीब मजदूर है, सीमित कमाई में परिवार चलाता है और यह भत्ता बारबार बढ़ाया जा रहा है। लेकिन कोर्ट ने साफ शब्दों में कहा कि पति का फर्ज है पत्नी का पेट पालना। अगर पत्नी खुद कमाने में असमर्थ है, तो पति को चुपचाप देना होगा।

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मजदूर भी कमाता है 18 हजार महीना
कोर्ट ने पति की आय का ब्योरा जांचा और पाया कि एक साधारण मजदूर प्रतिदिन कम से कम 600 रुपये तो कमा ही लेता है। इससे मासिक आय आसानी से 18,000 रुपये बन जाती है। ऐसे में 3,000 रुपये का भत्ता उसकी जेब पर भारी नहीं पड़ता। कोर्ट ने जोर देकर कहा कि आज की महंगाई में यह राशि तो बिल्कुल न्यूनतम है। दंड प्रक्रिया संहिता की धारा 127 के तहत निचली अदालत ने बढ़ोतरी का सही फैसला लिया था।
पति पक्ष ने दलील दी कि अदालत ने सभी तथ्यों पर गौर नहीं किया, लेकिन सरकारी वकील ने कड़ा विरोध किया। उन्होंने कहा कि बढ़ती कीमतों के जमाने में पत्नी को इतनी मामूली रकम भी मुश्किल से गुजारा कर पाएगी। कोर्ट ने इसे स्वीकार करते हुए पति को नैतिक और कानूनी चेतावनी दी।
25 परसेंट नियम क्या कहता है? सुप्रीम कोर्ट के फैसलों से सीखें
हाईकोर्ट ने ऊपरी अदालतों के पुराने फैसलों का जिक्र किया, जहां स्पष्ट है कि भरण-पोषण पति की आय का लगभग एक चौथाई तक हो सकता है। चाहे पति मजदूर हो या अमीर, दायित्व वही रहता है। ऐसे फैसले महिलाओं को आर्थिक रूप से मजबूत बनाते हैं और पारिवारिक झगड़ों में न्याय सुनिश्चित करते हैं।
यह फैसला लाखों महिलाओं के लिए मिसाल बनेगा। अगर आपका भी कोई ऐसा केस चल रहा है, तो अब हिम्मत रखें। कानून आपके साथ है। लेकिन याद रखें, हर मामला अलग होता है, इसलिए वकील से सलाह लें। क्या आने वाले दिनों में ऐसे और फैसले सुनने को मिलेंगे? समय बताएगा।
















